जोधपुर.
विवेक विहार योजना जब लॉच की गई तो जोधपुर विकास प्राधिकरण ने प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी आवासीय योजना का दावा किया था। शुरुआत में ही सडक़, सीवरेज लाइन के साथ बिजली काफी हद तक उपलब्ध करवा दी गई। लेकिन लोगों का यहां बसना फिर भी शुरू नहीं हुआ। जेडीए ने भी यहां से ध्यान हटा कर दूसरी ओर लगा दिया। शत-प्रतिशत आवास आवंटन के बाद भी यहां लोगों ने अपने मकान बनाना उचित नहीं समझा। इसका कारण है सरकारी स्तर पर सुविधाएं पूरी नहीं देना।
करीब 10 साल का समय होने को आया यहां पेयजल भी जेडीए सुनिश्चित नहीं कर पाया। इस बीच कई लोगों यहां भूखंडों पर निर्माण करने के लिए आवेदन किए। लेकिन बिना पेयजल लाइन के वहां अपना आवास पूरा करने में लोग हिचकने लगे। यही कारण है कि 12 हजार से भी ज्यादा मकान बनाने की क्षमता रखने वाली योजना में अब तक मुश्किल से 100 मकान में भी रहवास शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि 31 करोड़ की राशि पीएचइडी की ओर से डिमांड की गई है, जिसे अब जेडीए ने कार्यसमिति में जारी करने की सहमति प्रदान की है।
फैक्ट फाइल
- 2011 में यह योजना लॉच हुई
- 12 हजार से ज्यादा भूखंड है
- 400 करोड़ से अधिक की आय हुई थी जेडीए को उस योजना से
- 31 करोड़ का बजट चाहिए इस योजना के लिए
अब कार्यसमिति से जगी उम्मीदें
करीब 10 साल के अंतराल के बाद अब इस सबसे बड़ी आवासीय योजना में पेयजल की उम्मीदें जगी है। जेडीए की कार्यसमिति ने विवेक विहार के साथ मामा अचलेश्वर नगर योजना मे पेयजल के लिए बजट को हरी झंडी दी है। 31.27 करोड़ रुपए का बजट पीएचइडी ने बना कर दिया है इस योजना के लिए। 29.5 करोड़ की राशि तुरंत पीएचइडी को सुपुर्द होगी तो इसका काम शुरू होगा।
इनका कहना...
जेडीए की योजनाओं में सुविधाएं उपलब्ध करवाना हमारी जिम्मेदारी है। पिछले कुछ समय में यदि ये सुविधाएं नहीं मिल पाई है तो अब उपलब्ध करवाएंगे। सुविधाएं देंगे तो वापस भूखंड भी अच्छी दर पर बिकेंगे।
- कमर उल जमान चौधरी, आयुक्त, जेडीए जोधपुर।
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