जोधपुर. वनभूमि की सुरक्षा के लिए बने वन संरक्षण अधिनियम-1980 (एफसीए) लागू होने के चार दशक बीतने के बावजूद पूरे प्रदेश में एक भी दोषी सरकारी अधिकारी को सजा नहीं मिली है। प्रदेश की वनभूमि पर अतिक्रमण, अवैध खनन के हजारों मामले सामने आने के बावजूद दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। इसका प्रमुख कारण वनविभाग का वनभूमि मामलों में लीगल स्टेट्स कमजोर होना भी है। पूरे प्रदेश में 4749.21 वर्ग किमी वनभूमि का वनविभाग के नाम भू-रूपान्तरण होना अभी भी बाकी है। इसमें तहसीलदार और जिला कलक्टरों को 1998 में राज्य सरकार के आदेश देने के बावजूद यह काम अभी तक पूरा नहीं हो रहा है।
राज्य में वनभूमि की वर्तमान स्थिति
कुल वनभूमि--32845 वर्ग किमी
राजस्व अभिलेखों में अमलदरामद-28096 वर्गकिमी
अभी भी अमलदरामद से वंचित भूमि-4749.21 वर्ग किमी
वनभूमि डायवर्जन की पूरी प्रक्रिया अब ऑन लाइन
प्रत्यावर्तन ( डायवर्जन) के प्रस्ताव में आवश्यक अनुमति वन एवं पर्यावरण मंत्रालय दिल्ली की ओर से जारी होती है। हाल ही में पूरी प्रक्रिया को ऑन लाइन कर दिया गया है।
पूरे भारत में लागू है वन संरक्षण अधिनियम
वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर वानिकी कार्य अथवा वन भूमि का किसी भी रूप में प्रयोग करने के लिए देश के सभी सरकारी विभाग के अधिकारियों यहां तक राज्य सरकार को भी भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से दो चरणों में स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। कानून का उल्लंघन करने वाले दोषी सरकारी अधिकारी को 15 दिन कारावास का प्रावधान है।
जोधपुर के वनखंडों में आबाद हो गई 50 बस्तियां
जोधपुर में अलग अलग वन खंडों पर वर्तमान में 50 से अधिक कच्ची बस्तियां आबाद होकर हजारों की संख्या में अतिक्रमण हो चुके हैं। बस्तियों में भारत सरकार की अनुमति बिना सड़क निर्माण, पानी की लाइनें व हजारों की संख्या में बिजली के पोल पीएचईडी की ओर से वनभूमि पर सैकड़ों पानी की टंकियों का निर्माण, जेडीए की ओर से रिहायशी कॉलोनियां, जनप्रतिनिधियों की ओर विधायक कोष से वनभूमि पर करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा चुके है। लेकिन आज तक एफसीए उल्लंघन मामलों में एक भी दोषी सरकारी अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।
एनजीटी आदेश तक की पालना नहीं
एनजीटी ने जोधपुर जिला प्रशासन, वनविभाग के अधिकारियों को हाल ही में अपने आदेश में बेरीगंगा वन खंड वन क्षेत्र का सर्वे करने और सीमांकन का आदेश दिया लेकिन अधिकारियों ने एनजीटी के आदेश की अभी तक कोई पालना नहीं हो रही है।
रामजीव्यास, पर्यावरणविद जोधपुर
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