नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. कलात्मक रेजीडेन्सी दो मंजिला इमारत का निर्माण महाराजा जसवन्तसिंह ( द्वितीय ) ने सन 1890 में करवाया जो 1947 तक ब्रिटिश रेजीडेन्ट कार्यालय और निवास स्थान रहा । इसके सामने की सड़क को आज भी रेजीडेन्सी रोड के नाम से ही जाना जाता है। स्वतंत्रता के बाद 1957 से 1963 तक यह भवन अधिकारी प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में प्रयुक्त हुआ । सन 1963 में जोधपुर विश्वविद्यालय ने राजस्थान सरकार से इसे अपने केन्द्रीय कार्यालय की स्थापना के लिए क्रय कर लिया और उसी समय से जोधपुर विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) का केन्द्रीय कार्यालय इसी भवन में स्थापित है । यह बंगला पहले महाराजा हनवन्तसिंह ने अपने छोटे भाई हिम्मतसिंह को निवास के लिए प्रदान किया था । उन्होंने इस इमारत को विश्वविद्यालय को सुपुर्द कर दिया । कलात्मक भवन की रूपरेखा जोधपुर रेलवे के प्रथम मैनेजर डब्ल्यू होम ने तैयार की थी एवं उन्हीं के निरीक्षण में इसका निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ ।
46 हजार 911 रुपए में बना भवन
रेजीडेन्सी भवन की मुख्य इमारत पर उस समय 46 हजार 911 रुपए व्यय हुए तथा रेजीडेन्सी भवन की पूरी इमारत जिसमें इसके आस - पास के क्वार्टर व अन्य भवन की कुल लागत 1 लाख 61 हजार 313 रुपए सन 1899 तक व्यय हुए थे। जोधपुर नगर की पुरानी रेजीडेन्सी पूर्व में सन् 1839 में जोधपुर के महाराजा मानसिंह के समय में राज्य के सूरसागर महल में स्थापित की गई । उस समय जोधपुर में 28 सितम्बर सन 1839 को ब्रिटिश सरकार की ओर से जोधपुर में प्रथम रेजीडेन्ट केप्टिन जान लडलू नियुक्त होकर जोधपुर आए । जिनका निवास एवं दफ्तर उस वक्त सूरसागर के महलों में था । महाराजा जसवन्तसिंह द्वितीय (1873-1895) के राज्यकाल में रेजीडेन्सी का नया भवन सर प्रताप के बंगले के पास सन 1890 में बनाया गया ।
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