नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. चांदपोल स्थित विद्याशाला का निर्माण महाराजा तखतसिंह के समय में एजेन्ट फीरंच के सुझाव पर सन 1845 में करवाया गया था। विद्याशाला में ब्राह्मण बालकों के अध्यापन की व्यवस्था प्रारम्भ हुई । एक अंग्रेजी, एक फारसी, एक पण्डित, दो संस्कृत पढ़ाने वालों की नियुक्ति की गई । पांच वर्षों तक यह विद्यालय चलता रहा । इसके बाद यह विद्यालय किसी कारण वश बंद हो गया । विद्याशाला का स्थान पहले बड़ा माजी चौहानसा का बाग कहलाता था । महाराजा तखतसिंह के समय इसका नाम विद्याशाला रखा गया । बीकानेर अभिलेखागार से प्राप्त हकीकत बहियों में बही संख्या 7 के पत्रांक 115 ब से ज्ञात होता है कि विद्याशाला का निर्माण महाराजा मानसिंह के राज्य काल में हुआ था । महाराजा तखतसिंह ने इसमें सुधार करवाया तथा उनके समय अनेक अन्य भवनों का भी निर्माण करवाया गया । विद्याशाला के महल बन जाने पर महाराजा तखतसिंह भी यदा कदा रहने लगे थे । बाद में मुंशी हरदयालसिंह भी इस महल में रहे । सन 1866 में तेलंग और दीवाण मरदान अली खां का भी डेरा भी रहा । महाराजा जसवंतसिंह ( द्वितीय ) के समय पोल और महलों को आगे बढ़ाकर नवीन कार्य और बगीचा लगवाया गया । विद्याशाला की इमारत विगत दो सौ वर्षों से शिक्षा का केन्द्र रही है और वर्तमान में भी सरकारी विद्यालय चलता है । विद्याशाला भवन के दो पुराने चित्र मिलते हैं जिससे इसका पेनोरामिक दृश्य देखने को मिलता है ।
फोटो-साभार एमएमटी
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3k6SQap
0 comments:
Post a Comment