जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पर्वतों के संरक्षण के लिए बने बायलॉज को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार को आखिरी मौका देने के बावजूद प्रत्युत्तर दाखिल नहीं करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने न्याय हित में राज्य को राजस्थान स्टेट लीगल सर्विस ऑथोरिटी में पांच हजार रुपए जमा करवाने की शर्त पर प्रत्युत्तर पेश करने का अंतिम अवसर दिया है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश देवेन्द्र कछवाहा की खंडपीठ झील संरक्षण समिति की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें झीलों की नगरी उदयपुर में पर्वतों की कटाई और झीलों का कैचमेंट सिस्टम प्रभावित होने का मुद्दा उठाया गया है। अधिवक्ता शरद कोठारी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने अब तक जवाब पेश नहीं किया है। कोर्ट ने देखा कि11 फरवरी को अंतिम मौका दिया गया था। उसके बाद 7 जुलाई को भी एक बार सुनवाई टल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब पेश नहीं किया। याचिका के अनुसार उदयपुर शहर तथा इसके आस-पास के इलाकों में पर्वतों की कटाई कर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जो कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हैं। पहाडिय़ां काटकर उसका मलबा कैचमेंट इलाकों में डाला जा रहा है, जिससे झीलों का जल संग्रहण सिस्टम प्रभावित होने की आशंका है।
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