जोधपुर. शहर में स्कूलें पूरी तरह से बंद है। आधे से ज्यादा स्कूल में शहर में ऑनलाइन स्टडी के कागज बच्चों को भेज रहे है। सारा काम अभिभावकों के जिम्मा आया हुआ है। कुछ स्कूल महज दो-तीन घंटे ऑनलाइन पढ़ा रही है। अभिभावकों का मानना है कि ऑनलाइन स्टडी में कई बच्चों को पूरी तरह से बात समझ नहीं आ पा रही है। निजी स्कूलें बच्चों का साल बचाने के लिहाज से ही इस बार पूरे साल की फीस ले रही है। ये फीस भी शहर में अलग-अलग स्कूलें 50 हजार से 1 लाख रुपए तक वसूल रही है। बच्चों को पढ़ाई में रेग्यूलर रखने के लिए एक प्रकार से निजी शिक्षण संस्थानों का यह इमोशनल ब्लैकमेल करने का फंडा है। शहर के नामचीन स्कूलों के इस फार्मूले को शहर की गली-मोहल्ले में चलने वाली छोटी स्कूृलें भी बखूबी फॉलो करती देखी जा सकती है।
छोटी क्लासेज को होमवर्क भेज कर रहे कर्तव्यों से इतिश्री
शहर में कई स्कूल छोटे बच्चों को ऑनलाइन होमवर्क व सोशल साइट्स से वीडियो डाउनलोड कर भेज रही है। इसके बाद सारी मेहनत अभिभावकों की है। अभिभावक खुशबू बताती है कि उनके घर में पहले से एक छोटा बच्चा है, जो अब स्कूल जाएगा। ऐसे में उनकी बच्ची का दिनोंदिन निजी स्कूल खुद बिना पढ़ाए कोर्स भारी किए जा रही है। उन्हें खतरा है कि इस साल उनकी बच्ची की पढ़ाई यों भी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में स्कूल ने पहली इंस्टॉलमेंट ले ली है। पूरी फीस मांगने के स्कूल यों भी हकदार नहीं है। निजी स्कूल अपनी ओर से किसी प्रकार की मेहनत नहीं करवा रहे है।
9 से 12वीं तक के बच्चों को 3 से 4 घंटे पढ़ा रहे
शहर में कई स्कूल कक्षा 9 से 12वीं तक के बच्चों को 3 से 4 घंटे पढ़ा रहे है। कई बच्चों को ऑनलाइन पूरी बात समझ नहीं आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे ऑनलाइन स्टडी के आदि नहीं है। ऐसे में जबरदस्ती ऑनलाइन पढ़ाकर स्कूल वाले पूरी फीस मांग रहे है।
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