जोधपुर. स्थाई लोक अदालत ने त्रुटिपूर्ण निर्माण के बावजूद आवंटी को कब्जा लेने के लिए दबाव डालने को अनुचित मानते हुए डेवलपर 5.30 लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। उसे परिवाद पेश होने की तिथि से प्रति माह 12 हजार 355 रुपए हर्जाना और जमा राशि 37 लाख 21 हजार 725 रूपए पर 9 फीसदी ब्याज देने का आदेश दिया गया है। डेवलपर को 12 लाख रुपए बतौर ब्याज तथा 5.30 लाख रुपए हर्जाना देना होगा।
अदालत के अध्यक्ष ओमकुमार व्यास और सदस्य मगनलाल बिस्सा ने हर्जाना व ब्याज विला निर्माण सही कर कब्जा सुपुर्द किए जाने तक अदा करने और तब तक आवंटी से सुविधा शुल्क की वसूली नहीं करने के निर्देश भी दिए। आवंटी विमला बाफना की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से पेश परिवाद पर स्थाई अदालत ने यह फैसला सुनाया। परिवादी ने 2 नवम्बर 2007 को पाश्र्वनाथ रायल विलाज सिटी में 43 लाख 78 हजार 500 रूपए कीमत का विला बुक करवाया था। डेवलपर के ऑफर पर 75 फीसदी राशि भी एक मुश्त दे दी। परिवादी से निर्माण 18 माह में पूरा कर कब्जा देने का एग्रीमेंट किया गया।
परिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि डेवलपर ने दिसम्बर 2014 में परिवादी को विला निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी। जनवरी 2015 में भौतिक सत्यापन के दौरान निर्माण सही नहीं मिला। परिवादी को 16 अप्रैल को एक माह में बकाया 5 फीसदी राशि, होल्डिंग शुल्क 2 लाख 84 हजार 165 रूपए व सालाना सुविधा शुल्क 8764 रूपए जमा कराकर कब्जा लेने अन्यथा 24 फीसदी ब्याज अदा करने का कहा गया। भंडारी ने कहा कि इस तरह का दबाव अनुचित व्यापार व्यवहार का उदाहरण है।
डेवलपर्स की ओर से कहा गया कि विला निर्माण में देरी जानबूझ कर नहीं की गई। परिवादी विला कब्जे को टालना चाहती है। एग्रीमेंट में मध्यस्थता खंड होने से यह अदालत परिवाद को नहीं सुन सकती है।
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