जोधपुर. जोधपुर में मिलावट का व्यापार भी करोड़ों पार है। मिलावटी कब और कहां मिलावट कर रहे हैं, इस बात की भनक स्वास्थ्य विभाग को लग नहीं पा रही। इसी कारण सरकार ने मिलावट पकड़वाने पर इनाम की घोषणा कर रखी है। जोधपुर में बीते 10 सालों का रिकॉर्ड खंगाले तो 28.43 फीसदी नमूने ही फेल हुए है। कुल 2237 सैंपल में से सिर्फ 636 सैंपल ही विभाग फेल करवा पाया है। हालांकि ये आंकड़ा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के टारगेट के जितना ही है, लेकिन इन सब के बावजूद मिलावटखोर विभाग के गिरेबां से अभी कोसों दूर हैं। दस वर्षों में 1601 सैंपल पास हुए हैं। मिलावटियों से 10 साल में 78 लाख 27 हजार रुपए की पैनल्टी वसूली गई है। मिलावटखोर पकड़ नहीं आने का मुख्य कारण जोधपुर का बड़ा क्षेत्रफल और उस अनुरूप खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं होना भी है।
दस सालों में महज 127 आइटम ही मिले अनसेफ
विगत दस वर्षों की बात करें तो 127 आइटम ही चिकित्सा विभाग को खाने में अयोग्य मिले, जो एक प्रकार से लोगों के लिए धीमा जहर था। वहीं सर्वाधिक 337 प्रकरण सबस्टैण्डर्ड के मिले, जो अमानक थे, जिनमें मानक अनुरूप पोषण नहीं था। इसके अलावा पैकेजिंग में गड़बड़ी वाले 172 मिस ब्रांड के प्रकरण सामने आए।
साल दर साल की जानिए रिपोर्ट
साल - नमूने - फेल
2012 - 184 - 51
2013 - 130 - 44
2014 - 162 - 31
2015 - 302 - 83
2016 - 374 - 99
2017 - 334 - 125
2018 - 259 - 73
2019 - 282 - 74
2020 अब तक - 337 - 172
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3jPwji5
0 comments:
Post a Comment