जोधपुर. कांग्रेस में दावेदारों का सूचियों के लिए इंतजार लम्बा हो गया। देर रात तक कयास लगते रहे, लेकिन सूची नहीं आई। पर्यवेक्षक सूची को सीएम अशोक गहलोत के पास लेकर गए। लेकिन वहां भी औपचारिक घोषणाा नहीं हो सकी। इधर, भाजपा में 115 की सूची के बाद बगावती तेवर तेज हो गए। तीन वार्ड ऐसे भी हैं जहां दो से अधिक संतानों वालों को टिकट देने की बात सामने आई है। पांच विचाराधीन सीटों पर भी निर्णय नहीं हो सका।
कांग्रेस के पर्यवेक्षक सूचियों को अंतिम रूप देकर उस पर मुहर लगाने के लिए सीएम अशोक गहलोत के पास लेकर गए। दिनभर कयास लगते रहे कि देर रात तक सूची जारी होगी। कई नेताओं व प्रत्याशियों को पहले ही दस्तावेज तैयार करने का बोल दिया गया था। बगावत ज्यादा न हो इसके लिए सूचियों में देरी की गई। अब उम्मीद यह है कि सोमवार सुबह जल्दी सूची जारी की जा सकती है या फिर प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करने का बोल कर पार्टी बाद में सीधे ही वार्डवार जमा करवा सकती है।
नेताओं के अलग-अलग जवाब
कई नेता यह कहते दिखे कि सूची नहीं आएगी और सीधे सिंबल ही जमा होंगे। वहीं कई नेता देर रात तक सूची के इंतजार में बैठे रहे। कांग्रेस के लिए आसान था कि भाजपा ने पत्ते पहले खोल दिए। फिर भी बगावत के डर से सूची समय पर जारी नहीं की जा सकी।
वायरल होती रही हस्तलिखित सूची
औपचारिक सूची आने से पहले की हस्तलिखित एक सूची वायरल होती रही। उसी के आधार पर गहलोत-पायलट गुट के लोग भी टिकट बंटवारे को लेकर खींचतान करते नजर आए।
भाजपा को बगावत का डर, कई पुराने कार्यकर्ता टिकट नहीं मिलने से नाराज
जोधपुर. भारतीय जनता पार्टी ने १५५ सीटों पर उम्मीदवार उतार तो दिए लेकिन अब बगावत का डर सता रहा है। २५ से ३० एेसे वार्ड हैं जिनमें बगावत खुल कर सामने आ सकती है। हालांकि डेमेज कंट्रोल के लिए फ्रंट लाइन को आगे किया गया है। लेकिन इसमें कितनी सफलता मिलती है यह नामांकन और नाम वापसी के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा में एक धड़े के लोगों के चहेतों के नाम भी नजर अंदाज करने की बात सामने आई है।
इस बार सूची में १५५ में से १७ मुस्लिम टिकट वितरण किए गए हैं। इनमें भी ७ महिलाएं हैं। यानि अल्पसंख्यकों में महिला नेतृत्व को आगे लाने और कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक ध्वस्त करने की प्लानिंग की है। लेकिन इससे भाजपा का परम्परागत वोट बैंक खिसक सकता है। इधर, ३० से ज्यादा वार्ड में भाजपा के प्रत्याशियों के खिलाफ असंतोष सामने आया है। फ्रंट लाइन के करीब ५ से ७ नेताओं, मंडल अध्यक्षों को टारगेट दिया गया है कि वे डेमेज कंट्रोल शुरू कर दे।
एक धड़ा पूरा नजर अंदाज
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़े नेताओं के धड़े को नजर अंदाज करने की बात भी सामने आई है। कोर कमेटी में उस गुट के नेताओं को शामिल किया, लेकिन बैठकों में नहीं बुलाया। विरोध यह भी उन नेताओं के दिए गए नामों को भी सूची में स्थान नहीं मिला।
इनका कहना...
बगावत जैसी कोई बात नहीं है। एक वार्ड से तीन से चार लोग टिकट मांगते हैं, लेकिन सभी को मौका नहीं मिल सकता। एक बार आक्रोश होता है, लेकिन हम सभी कार्यकर्ताओं के साथ बात कर रहे हैं। हमारा उम्मीदवार कमल का फूल है और उसे जिताने का प्रयास करेंगे। किसी दूसरे धड़े के नाराज होने की जानकारी मुझे नहीं है।
- राजेन्द्र गहलोत, नगर निगम चुनाव समन्वयक और राज्यसभा सांसद
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