CUMIN--- 80 प्रतिशत जीरा गुजरात जा रहा बिकने के लिए

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जोधपुर।

जीरा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्य होने के बावजूद राजस्थान का जीरा गुजरात की मंडिय़ों में बिकने के लिए जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण राजस्थान में पड़ोसी राज्य गुजरात से मंडी टेक्स ज्यादा होना है व गुजरात में राजस्थान से बेहतर विपणन व्यवस्था होना है। मंडी टेक्स कम होने की वजह से जीरे की प्रोसेसिंग इकाइयां (प्रसंस्करण) भी गुजरात में राजस्थान से ज्यादा है। इसलिए यहां की उपज वहां बिकने जाती है।

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80 प्रतिशत जीरा गुजरात जा रहा

पश्चिमी राजस्थान में जोधपुर में जीरे की विशिष्ट मंडी होने के बावजूद यहां उत्पादित होने वाली 2.50 लाख मीट्रिक टन फ सल में से केवल 20 प्रतिशत फ सल ही मंडी में बिकने के लिए आती है। यहां का 80 प्रतिशत जीरा गुजरात की उंझा मंडी में बिकने जाता है। इससे यहां प्रसंस्करण इकाइयां भी पर्याप्त मात्रा में लग पा रही है।

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किसानों को गुजरात जाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी

केंद्र सरकार के नए कानून में मंडी से बाहर मंडी टेक्स से छूट व प्रसंस्करण इकाइयों को किसानों से सीधी खरीद की छूट से यहां जीरा प्रोसेसिंग इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा। जहां उत्पादन वहां प्रसंस्करण इकाइयां लगने से किसानों को स्थानीय स्तर पर ही उंझा मंडी के बराबर जीरे के दाम मिल सकेंगे। इससे किसानों को अच्छे दामों की तलाश में गुजरात जाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।

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केंद्र के नए कानून से अब किसानों जहां उचित मूल्य मिलेगा, वहां फ सल बेचने की अनुमति होगी। किसान सीधे खेत में उपभोक्ता या प्रसंस्करणकर्ता को फ सल बेच सकेंगे।

तुलछाराम सिंवर प्रांत प्रचार प्रमुख

भारतीय किसान संघ

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नए कृषि कानून से जोधपुर में विकसित की गई प्रदेश की सबसे बड़ी जीरा मंडी का ढांचागत विकास प्रभावित होगा व व्यापार को नुकसान होगा। मंडी के अंदर किसानों की आवक कम व व्यापार को नुकसान होगा।

पुरुषात्तम मूंदड़ा, अध्यक्ष

जोधपुर जीरा मंडी व्यापार संघ



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