जोधपुर. शरद पूर्णिमा महोत्सव जोधपुर में शनिवार को दूसरे दिन भी घरों व मंदिरों में मनाया गया। निशिथ व्यापिनी पूर्णिमा होने के कारण शहर के प्रमुख मंदिरों में दूसरे दिन भी पुजारियों की ओर से शरद महोत्सव मनाया गया। धवल पोशाक में सुसज्जित कृष्ण मंदिरों में खीर- मतीरा, चिपड़ा, तरबूज सहित ऋतुफलों का भोग लगाया गया। शरदपूर्णिमा को षोड़श कलाओं से परिपूर्ण चन्द्रमा की अमृत किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होने की मान्यता के चलते घरों की छतों पर गाय के दूध से बनी खीर व ऋतु फलों को रखने के बाद सेवन किया गया। कोविड-19 के कारण पूर्णिमा को होने वाले गरबा रास महोत्सव इस बार स्थगित रहे। घरों में हरिनाम संकीर्तन किया गया। कृष्ण मंदिर में सजी महारास की झांकी रातानाडा स्थित कृष्ण मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। मंदिर पुजारी हरिभाई गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को शरद शृंगार कर रमणरेती (वृंदावन) रास की झांकी सजाई गई। शाम को 101 किलो दूध की खीर बनाकर रात्री को चन्द्रमा की किरणों में रखा गया। प्रसाद का वितरण रविवार सुबह 6 बजे से किया जाएगा। शरद शृंगार के बाद आरती में मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष इन्द्रसिंह सांखला, महिला मंडली अध्यक्ष शारदा चौधरी उपस्थित रहे।
कार्तिक स्नान प्रारंभ
शरद पूर्णिमा के साथ ही कार्तिक मास स्नान भी आरंभ हो गया। महिलाओं ने तुलसी पूजन कर कार्तिक माह के व्रत का संकल्प लिया। कार्तिक मास स्नान व्रत का पारणा 30 तारीख पूर्णिमा को होगा।
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