नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. नगर निगम की जोधपुर सीमा में स्थित सम्पूर्ण सिवायचक भूमियां चाहे वह रिक्त हो या अतिक्रमित सम्पूर्ण भूमि जोधपुर नगर निगम को हस्तांतरित की जा चुकी है। निगम के नाम हस्तातंरित करीब डेढ़ हजार खसरों में वनभूमि, पहाड़, ओरण, गोचर भूमि भी शामिल है। उपशासन सचिव - तृतीय , नगरीय विकास विभाग राजस्थान जयपुर की ओर से जोधपुर जिला कलक्टर को लिखित आदेश व निर्देश की पालना में निगम को हस्तातंरित करीब डेढ़ हजार से अधिक खसरों की भूमि को आगे नियमन / विक्रय / आवंटन करने से प्राप्त आय की 2.5 प्रतिशत राशि तेइस लाख पैतालीस हजार दौ सौ पचपन नियमानुसार राजस्व विभाग के आयमद भू - राजस्व मद में जमा कराया जा चुका है। आदेश के तहत तहसीलदार , जोधपुर हस्तांतरित भूमि का कब्जा नगर निगम जोधपुर के विधिक प्रतिनिधि को नियमानुसार सुपर्द कर राजस्व अभिलेख में अमलदरामद तथा राजस्व मानचित्र में तरमीम भी करवाएंगे। हस्तांतरित भूमि में शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाली वन भूमि के महत्वपूर्ण खसरों को भी शामिल कर लिया गया है। जबकि वर्ष 1980 में बनाए कठोर कानून वन संरक्षण अधिनियम के तहत गैर वानिकी कार्य के लिए वनभूमि के वैधानिक अस्तित्व से मुक्त करने के लिए भारत सरकार की मंजूरी अनिवार्य है। राजपत्र में वर्णित वनभूमि पर निगम ने योजना बनाकर बेचान भी कर दिया है।
जोधपुर में वन भूमि की स्थिति
कुल वन क्षेत्र-23664.51 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन क्षेत्र-10619.95
राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम से वंचित-13750. 78 हेक्टेयर
जोधपुर शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाले वन भूमि राजस्थान के राजपत्र में वर्णित है। उसके उपरांत भी वन भूमि का हस्तांतरण निगम को करना वन संरक्षण अधिनियम 1980 और सर्वोच्च न्यायालय निर्देशों का उल्लंघन है। राजपत्र में वर्णित बड़ा भाकर वन क्षेत्र की भूमि पर निगम ने फार्म हाउस योजना बनाकर बेचान करना शुरू किया है। बेरी गंगा वन खंड में खनन के मामले एनजीटी में विचाराधीन है। ऐसे वन क्षेत्र के खसरों को निगम निगम को हस्तांतरित करना अनुचित है।
रामजी व्यास, पर्यावरणविद एवं अध्यक्ष आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान जोधपुर।
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