खीचन में बनेगा देश का पहला कुरजां कंजर्वेशन रिजर्व

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फलोदी (जोधपुर). प्रवासी पक्षी कुरजां के शीतकालीन पड़ाव स्थल पर इन मेहमान परिन्दों को सुरक्षित, मनभावन एवं प्राकृतिक वातावरण सुलभ करवाने के लिए उनके पड़ाव स्थल खीचन में कुरजां कंजर्वेशन रिजर्व बनाने की कवायद शुरू की गई है।

संभवत: यह देश का पहला कुरजां कंजर्वेशन रिजर्व होगा। इसके लिए पूर्व में आवंटित जमीन के साथ प्रस्तावित अतिरिक्त जमीनों का अवलोकन करने के लिए वन व पर्यटन विभाग की टीम ने मंगलवार को खीचन गांव का दौरा किया। गौरतलब है कि संभागीय आयुक्त, जोधपुर के निर्देश पर टीम ने यह कार्रवाई की है।

संभागीय मुख्य वन संरक्षक एसआरवी मूर्ति, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) हनुमानराम चौधरी व पर्यटन विभाग की सहायक निदेशक डॉ.सरिता फिरोदा की टीम ने मंगलवार को खीचन पहुंचकर प्रवासी पक्षी कुरजां के पड़ाव स्थलों का दौरा किया तथा कुरजां कंजर्वेशन रिजर्व के लिए पूर्व में खसरा नंबर 170 में आवंटित 400 बीघा जमीन व इसके आस-पास स्थित खसरा नंबर 158, 160 व फलोदी के खसरा नंबर 596 की प्रस्तावित जमीनों का अवलोकन किया।

यह टीम खीचन में कुरजां संरक्षण के लिए जमीनों की उपलब्धता एवं प्रस्तावित प्लान की रिपोर्ट संभागीय आयुक्त को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर करीब 12 सौ बीघा अतिरिक्त जमीन आवंटित की जाएगी। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर हाकम खां, उप वन संरक्षक मुकेश कुमार सैनी, उपखण्ड अधिकारी यशपाल आहूजा, तहसीलदार महावीर प्रसाद, क्षेत्रीय वन अधिकारी (वन्यजीव) केके व्यास, आरआइ रामजीलाल, पटवारी पवन जोशी, महिपाल विश्नोई, पक्षी प्रेमी सेवाराम माली और समाजसेवी प्रेमसिंह राजपुरोहित आदि उपस्थित थे।

गंूजने लगी कुरजां की कलरव

मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने खीचन में गत माह दस्तक दे दी है। यहां अब तक करीब सात हजार कुरजां पहुंच चुकी है तथा रोजाना नए जत्थों के आगमन का सिलसिला बना हुआ है। कुरजां की मौजूदगी से खीचन गांव में कलरव की गंूज सुनाई देने लगी है। तापमान में गिरावट के साथ ही खीचन में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी। इसके साथ ही खीचन में कुरजां की अठखेलियां देखने के लिए पर्यटकों का तांता लगना शुरू हो जाएगा।

पक्षी शोध के लिहाज से भी है महत्वपूर्ण
कुरजां प्रति वर्ष सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में खीचन पहुंच जाती है तथा गर्मी की दस्तक के साथ ही मार्च में वतन वापसी की उड़ान भरती है। इस दौरान छह माह के शीतकालीन प्रवास में ये पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर खीचन को पर्यटक स्थल का रूप दे देते हैं। कुरजां का छह माह की लंबी अवधि तक प्रवास न केवल पर्यटन बल्कि पक्षी शोध के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है।



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