जोधपुर।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन्डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम विभाग की ओर से निर्यातकों के माल के खरीद-बेचान व निर्यात संबंधी अन्य जांचों के बाद भी उन पर लगाया गया 'रिस्की एक्सपोर्टरÓ का टेग नहीं हटाया जा रहा है। इससे इन निर्यातकों का आईजीएसटी रिफ ण्ड, ड्रॉ बैक व अन्य सरकारी प्रोत्साहन ब्लॉक कर दिए गए है। निर्यातकों के रिफण्ड रोकने से उनकी समस्याएं बढ़ती जा रही है । देश में ऐसे हजारों हैण्डीक्राफ्ट, टेक्सटाइल व अन्य उत्पादों का निर्यात करने वाले निर्यातक है, जिनको 'रिस्की एक्सपोर्टरÓ की श्रेणी में डाला गया । सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन्डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम के तहत आने वाले डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की ओर से देश के कुछ निर्यातकों द्वारा आईजीएसटी रिफ ण्ड में की गई हेराफेरी के कारण देश के कई अन्य निर्यातकों को भी रिस्की एक्सपोर्टर की श्रेणी में डाला गया। इसके तहत निर्यातकों के कन्टेनरों को खोलकर जांच की गई व उनके रिफण्ड रोक दिए गए थे।
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सितम्बर 2019 से टेक्सटाइल निर्यातकों का रिफण्ड अटका
शहर के टेक्सटाइल निर्यातकों को गत वर्ष सितम्बर में 'रिस्की एक्सपोर्टरÓ की श्रेणी में डाला गया है, तब से उनका आइजीएसटी रिफण्ड अटका हुआ है।
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नए आर्डर लेने में परेशानी
निर्यातकों को नए खरीदारों व मार्केट से ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन नकदी का संकट है। इस वजह से निर्यातकों को नए ऑर्डर लेने में हिचकिचाहट हो रही है।
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कोविड के कारण टेक्सटाइल उद्योग आर्थिक तंगी से जूंझ रहा है। लंबे समय से आईजीएसटी रिफ ण्ड में रूप में बड़ी राशि ब्लॉक हो गई है। विभाग के कमिश्नर, चीफ कमिश्नर व सीबीआइसी पोर्टल पर ऑनलाइन मेल कर दी, फिर भी जवाब नहीं मिल रहा है।
विनय कवाड़, टेक्सटाइल उद्यमी
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