जर्मन महिला से बलात्कार के आरोपी की भीलवाड़ा में हत्या

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जोधपुर.
बहुचर्चित जर्मन महिला से बलात्कार करने वाले जोधपुर के ऑटो रिक्शा की भीलवाड़ा के मंगरोप थाना क्षेत्र में हत्या कर शव कुएं में डाल दिया गया। परिजन को अंदेशा है कि महिला मित्र से मिलने के दौरान घरवालों को पता लग गया था तब उन्होंने मारपीट कर हत्या की और शव कुएं में फेंका होगा।

पाबुपूरा निवासी पूर्व पार्षद लक्ष्मण नायक ने बताया कि पाबुपूरा निवासी शंकरलाल पुत्र किशनलाल नायक जर्मन महिला से बलात्कार के मामले में डेढ़ माह पूर्व सजा पूरी कर जेल से बाहर आया था। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अच्छे चाल-चलन व व्यवहार के चलते उसे दो साल पहले ही छोड़ दिया गया था। शादीशुदा एक महिला के बुलावे पर शंकरलाल गत १६ सितम्बर को मोटरसाइकिल लेकर भीलवाड़ा गया था, जहां मारपीट कर उसकी हत्या कर दी गई थी और आंखें निकालकर शव मंगरोप थाना क्षेत्र के एक कुएं में छुपा दिया गया था।
आस-पास के ग्रामीणों ने कुएं में शव देखा तो पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने शव बाहर निकलवाया था। मृतक के पास मिले मोबाइल की सिम भीग चुकी थी। उसके सूखने पर पुलिस ने शंकर के भाई श्रवण को रविवार को सूचना दी। तब परिजन भीलवाड़ा पहुंचे, जहां मंगरोप थाने में महिला व उसके परिजन पर हत्या का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवा शव परिजन को सौंप दिया।

सड़-गल चुका था शव
परिजन को अंदेशा है कि महिला से मिलने के दौरान परिजन ने देख लिया होगा। गुस्साए घरवालों ने शंकर से मारपीट कर हत्या की। साथ ही उसकी आंखें भी निकाल ली। शव को कुएं में फेंक दिया। पुलिस ने शव बाहर निकाला तो वह सड़ व गल चुका था।

रात को ही अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद मृतक के परिजन शव लेकर रात को जोधपुर पहुंचे। शव के घर पहुंचते ही घरवालों के आंसू निकल आए। आंखों में आंसू लिए वृद्ध माता-पिता ने अंतिम दर्शन किए। बाद में अंतिम यात्रा निकाली गई। क्षेत्र के श्मशानस्थल में रात को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के दो भाइयों का निधन हो चुका है। अब सिर्फ एक भाई श्रवण ही वृद्ध माता-पिता का आसरा बचा है।

जेल में महिला से मित्रता, पैरोल पर मिलने जाता था
परिजन का कहना है कि जेल सजा काटने के दौरान एक युवक भी शंकरलाल के साथ में बंद था। उसके मार्फत वह उस महिला से सम्पर्क में आया था। दोनों में मोबाइल पर बातचीत होती थी। पैरोल पर जेल से बाहर आने पर भी वह मिलने के लिए भीलवाड़ा जाता था।

16 दिन में दोनों बलात्कारियों को सुनाई गई थी सजा
जर्मनी की एक महिला पर्यटक मई 2005 में जोधपुर आई थी। 11 मई 2005 को वह ऑटो रिक्शा से डांगियावास गई थी, जहां ऑटो रिक्शा चालक शंकरलाल नायक व साथी राकेश ने उसके साथ बलात्कार किया था। इस संबंध में पुलिस स्टेशन शास्त्रीनगर में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मात्र सोलह दिन में सुनवाई पूरी कर ११ मई २००५ को दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।



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