जोधपुर. सप्त ऋषियों एवं पूर्वजों के प्रति आस्था व्यक्त करने से जुड़ा ऋषि पंचमी पर्व रविवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। ऋषि पंचमी के उपलक्ष्य में कायस्थ, ब्राह्मण, माहेश्वरी समाज में बहनों ने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की। इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण श्रीमाली व शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज की युवतियों व महिलाओं ने सप्त ऋषियों एवं ऋषि पत्नियों के नाम सगोत्र शास्त्रोक्त विधि से तर्पण कर मोक्ष की कामना की। कायलाना गौरेश्वर महादेव मंदिर जलाशय, चांदपोल के बाहर भूतेश्वर वनक्षेत्र स्थित मिनका नाडी व पदमसर जलाशय की पाळ पर महिलाओं ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के बीच तर्पण करते हुए सप्तऋषियों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। व्रती महिलाओं ने ससुराल व पीहर पक्ष की तीन-तीन पीढिय़ों तक के दिवंगत पूर्वजों का तर्पण किया। तर्पण के बाद नीम, आक, पीपल तथा हाटी-काटी वृक्ष का पूजन कर ऋषि पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का श्रवण किया। कथा श्रवण के बाद मणीचा (बिना बोया धान) की खीर, तुरई-काचरे की सब्जी, केर-सांगरी का रायता पितरों को अर्पित कर व्रत का पारणा किया।
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