जैन आराधकों ने कहा मिच्छामि दुक्कड़म

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जोधपुर. श्वेताम्बर, स्थानकवासी और मूर्तिपूजक जैन समाज की ओर से शनिवार को संवत्सरी क्षमापना दिवस मनाया। समाज के लोगों ने उपवास, एकासन, आयंबिल तप करते हुए देर शाम संवत्सरी प्रतिक्रमण किया। प्रतिक्रमण के बाद जाने अंजाने, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मन, काया और आत्मा से हुए अपराधों भूलों के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से रिश्तेदारों, मित्रों, परिचितों सहित समस्त 84 लाख योनियों से मिच्छामि दुक्कड़म.....कहकर क्षमायाचना की। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण चातुर्मास स्थलों पर होने वाला तप आराधकों का बहुमान इस बार स्थगित किया गया। चातुर्मास स्थलों पर आगामी दिनों में होने वाले स्वामीवात्सल्य के आयोजन भी स्थगित कर दिए गए।

सामूहिक आत्म लोचना का आयोजन

जोधपुर के नेहरू पार्क स्थित महावीर भवन में राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि हमारे क्रोध करने पर अगले का नुकसान हो या ना हो उस ज्वाला में हमारे सभी सद्गुण जलकर नष्ट हो जाते हैं। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि जिसमें क्रोध का भूत सवार होता है मानसिक संतुलन खो बैठता है । ब्लड प्रेशर हाई का का शिकार बन सकता है।
राष्ट्रीय संत ने कहा कि पल भर के क्रोध में वर्षों पुराने मधुर संबंध भी खाक में मिल जाते हैं ।जप तप और साधना भी स्वाहा हो जाते हैं ।क्रोध अपने आप में हिंसा है। जैन संत ने कहा कि क्षमा सबसे बड़ा तप है उसी में धर्म और मोक्ष का निवास है ।कायर आदमी क्षमा नहीं कर सकता ।यह वीरो का आभूषण है क्षमा दान सबसे बड़ा दान है । क्षमा लेने और देने पर दोनों आत्मा निर्मल और पवित्र बन जाती है । उसी में धर्म का निवास होता है ।सामूहिक आत्म लोचना का आयोजन सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के साथ किया गया।



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