जोधपुर.अखंड सुहाग व मनोनुकूल वर की कामना से जुड़ा लोकपर्व बड़ी तीज (कजळी तीज ) गुरुवार को पारम्परिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। चन्द्रप्रधान व्रत रखने वाली सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य व कुंवारी कन्याएं मनोनुकूल वर की कामना से तीज का व्रत रखा। दिन भर निराहर रहकर रात्रि चन्द्रोदय के दर्शन व पूजन के बाद अग्र्य देकर व्रत का पारणा किया। रात्रि करीब 9.32 बजे हुए चन्द्रोदय के बाद तीजणियों ने आक के पत्तों में सात बार दूध मिश्रित जल का आचमन किया। सुहागिन तीजणियों ने जोधपुर की परम्परानुसार पीहर से भेजे गए देशी घी से निर्मित सत्तू के पिण्ड को पति के हाथों पासने की रस्म के बाद भोजन ग्रहण किया। सूर्यास्त के बाद नख से शिख तक सजी धजी तीजणियों ने मंदिरों के कपाट बंद होने के कारण परिवार व मोहल्ले की बुजुर्ग महिलाओं से ही तीज माता की पौराणिक कथाओं का श्रवण किया।
नवविवाहित तीजणियों में रहा उत्साह
तीज के उपलक्ष्य में तीजणियां मेहंदी रचाने में व्यस्त नजर आई। नवविवाहित तीजणियों में खासा उत्साह नजर आया। व्रत रखी तीजणियों ने घरों के भीतर ही अस्थाई तळाई में दूध-दहीं मिश्रित जल (फेदड़) में मोती, ककड़ी, ऋतु फलों, आक का पत्ता, सत्तू, चावल, रौळी, मोळी, नीम्बू, मेहंदी, नीमड़ी की प्रतिकृति के दर्शन किए। कई मोहल्लों में सामूहिक पूजन के दौरान तीजणियां मुंह पर मास्क लगा कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करती भी नजर आई। तीज का उद्यापन करने वाली सुहागिन तीजणियों ने 16 परिचित तीजणियों को सत्तू से भरे पात्र भेंट किए।
अब ऊब छठ का कठिन व्रत 9 को, देर रात होगा चन्द्रोदय
भगवान कृष्ण के बड़े भ्राता बलराम का जन्म दिवस (चंदनषष्ठी पर्व) ऊब छठ के रूप में मनाया जाएगा। सुहागिनें घर-परिवार की सुख समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए सूर्यास्त बाद चंदनयुक्त जल सेवन कर व्रत का संकल्प लेंगी। संकल्प के बाद निरंतर चन्द्रोदय तक खड़े रहकर उपासना एवं पौराणिक कथाओं का श्रवण करेंगी। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि मौसम साफ रहेगा तो चन्द्रोदय रात्रि 11 बजे होगा।
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