सूर्य और मंगल के शुभ संयोग के बीच घरों में विराजेंगे विनायक

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जोधपुर. विघ्न विनाशक प्रथम पूज्य भगवान गणेश का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी शनिवार को मनाया जाएगा। इस बार गणेश उत्सव पर हस्त नक्षत्र प्रभावी रहेगा । गणेश चतुर्थी ऐसे समय में मनाई जा रही है जब सूर्य सिंह राशि में और मंगल मेषराशि में है । सूर्य और मंगल का यह योग 126 साल बाद बन रहा है । गणेशोत्सव के लिए इॅको फ्रेण्डली गणेश प्रतिमाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं । हर साल गणेश चतुर्थी पर शहर की विभिन्न कॉलोनियों-मोहल्लों व बस्तियों में पांडाल सजाकर गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती है लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते विनायक घरों में ही विराजित किए जाएंगे।

दर्शनार्थियों के लिए बंद रहेंगे मंदिर

रातानाडा गणेश मंदिर में शनिवार को रिद्धि-सिद्धि सहित गणपति प्रतिमा को 51 किलो मोदक, पंचमेवा और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाया जाएगा। मंदिर के पुजारी कृष्ण मुरारी शर्मा, कमकिशोर, शिवशंकर, नरेश और महेश अबोटी ने जोधपुर शहरवासियों से गणेश चतुर्थी को घरों में ही इॅको फ्रेण्डली गणपति स्थापना कर पूजन करने की अपील की है। कोरोना महामारी के कारण रातानाडा गणेश मंदिर के पट पूरी तरह बंद रहेंगे। केवल पुजारियों की ओर से सुबह 5.15 बजे आरती के बाद 9.15 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। शुक्रवार शाम गणपति का विशेष शृंगार कर आरती की गई।ऐसे करें गणेश प्रतिमा की स्थापना गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत होकर गणेशजी की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है। एक कोरा कलश लेकर उसमें जल भरकर कोरे कपड़े से बांधा जाता है । कलश पर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है । इसके बाद प्रतिमा पर सिंदूर और षोडशोपचार पूजन कर उनके प्रिय मोदक के लडूओं का भोग लगाकर आरती की जाती है।

गणपति स्थापना के शुभ मुहूर्त

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथी शनिवार को सुबह 7.53 बजे से 9.28 बजे तक तथा बाद में दिन को अभिजित मुहुर्त 12.15 से 1.06 बजे तक का समय गणपति स्थापना व पूजन के लिए श्रेष्ठ रहेगा । पं. ओमदत्त शंकर ने बताया की शाम 7.10 तक हस्त नक्षत्र गणपति का जन्म नक्षत्र माना गया है इसीलिए इस चौघडि़ए में भी गणेशजी की स्थापना में शुभ है। इसके अलावा लाभ + अमृत- 2.16 बजे से 5 .28 बजे और शाम को लाभ 7.04 से 8.28 बजे तक भी गणपति पूजन किया जा सकता है। रात्रि गणपति पूजा में अभिषेक किया जाना चाहिए। पं. मोहनलाल गर्ग के अनुसार सुबह 7.51 से 9.27 तक हस्त नक्षत्र और सिद्धियोग में गणपति पूजन उत्तम व श्रेष्ठ रहेगा।



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