भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए दो दिवसीय वर्चुअल इवेंट 9 से

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जोधपुर. अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए दो दिवसीय वर्चुअल इवेंट 9 व 10 अगस्त को आयोजित होगा। दो दिवसीय इस वेबिनार मे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की ओर से भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के लिए विभिन्न समुदाय-आधारित पारंपरिक प्रदर्शनों और शिल्पों पर विचार व्यक्त किए जाएंगे। वल्र्ड इंडिजिनस डे के अवसर पर यूनेस्को की राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ लोक संवाद संस्थान, जयपुर और रूपायन संस्थान जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले वेबिनार में कहानी, प्रदर्शन कला और शिल्प जैसी गतिविधियों का आयोजन होगा। जिनका उद्देश्य समुदाय-आधारित पारंपरिक कौशल, संरक्षण, पदोन्नति के लिए जागरूकता फेलाना और स्वदेशी लोगों की जरूरतों और चिंताओं को दूर करना है। लोक संवाद संस्थान के सचिव कल्याण सिंह कोठारी ने कहा की इस आयोजन ने सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लोगो को आकर्षित किया है जिसमे 7 अगस्त तक 50 से अधिक देशों से 600 से अधिक पंजीकरण प्राप्त किए जा चुके है। इनमें संयुक्त राज्य अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, इंडोनेशिया, मलेशिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका,वियतनाम, बुरुंडी, बांग्लादेश और भारत के 25 राज्य शामिल है। उन्होंने बताया की पंजीकरण 1000 से अधिक तक होने की संभावना है।

यह भी कार्यक्रम होंगे

रूपायन संस्थान विभिन्न प्रकार के समुदाय-आधारित पारंपरिक शिल्प, कलाकृतियां, और कठपुतली बनाने , पेशेवर झाड़ू बनाने वाले, खानाबदोश जनजातियों की ओर से बनाए जाने वाले बर्तन, कालबेलिया नृत्य और अमूर्त सांस्कृतिक पर एक लघु फिल्म इत्यादि का प्रदर्शन बेबिनार के माध्यम से किया जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय प्रदर्शन कला - भारत सरकार की एजेंसी उनके जनसम्पदा संग्रह के तहत लघु फिल्मों के माध्यम से दिखाएगी । इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इनक्लूसिव म्यूजयि़म और यूनेस्को के हेरिटेज विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे संस्कृति और विशेष रूप से अमूर्त या जीवित संस्कृति विकास संबंधी पहलु में एक चालक हो सकती है।



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