पुष्करणा समाज मनाएगा मां उष्ट्रवाहिनी प्राकट्य दिवस

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जोधपुर. पुष्टिकरणा ब्राह्मणों की न्याति कुल देवी मां उष्ट्रवाहिनी का प्राकट्य दिवस श्रावण शुक्ल त्रयोदशी को चांदपोल के बाहर स्थित मंदिर में सादगी से मनाया जाएगा। यह दिवस पुष्टिकरणा दिवस के रूप में भी हर साल मनाया जाता है। मां उष्ट्रवाहिनी सेवा समिति के अध्यक्ष गुरु गोविन्द कल्ला ने बताया की इस बार वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण सभी लोग अपने घरों में रहकर ही पूजा अर्चना करेंगे। मन्दिर परिसर में फूल मंडली व रोशनी की जाएगी। सुबह 11.30 बजे आरती होगी।

मां उष्ट्रवाहिनी मंदिर में विराजे है काशी विश्वानाथ
चांदपोल के बाहर सिद्धपीठ रामेश्वर धाम के सामने ऊंचाई पर स्थित करीब 200 वर्ष प्राचीन पुष्करणा ब्राह्मणों की कुलदेवी उष्ट्रवाहिनी और आद्य शक्ति हिंगलाज माता मंदिर में काशी विश्वनाथ नर्बदेश्वरर नीलकंठ भी विराजित है। श्रावण मास में यहां नित्याभिषेक होता रहा है। मंदिर प्रांगण में शिव परिवार सहित संकट हरण हनुमान मंदिर, नृसिंह, लक्ष्मीनारायण, भैरवनाथ मंदिर भी है। श्रावण शुक्ल त्रयोदशी को मंदिर का पाटोत्सव मनाया जाता है। मंदिर में देवी उष्ट्रवाहिनी ऊंट पर सवार और हिंगलाज माता की अश्वारूढ़ प्रतिमा है। बताया जाता है कि दैवीय मूर्तियां जोधपुर के भीतरी शहर नवचौकियां मोहल्ले की बगेची से लाकर विधिवत प्रतिष्ठित की गई थी। दैवीय प्रतिमाओं के बीच लेख से सिद्ध होता है कि मंदिर विक्रम संवत 1877 तदनुसार 1820 में महाराजा मानसिंह के राज्यकाल में बनवाया गया होगा। मंदिर से जुड़े श्रद्धालु गुरु गोविन्द कल्ला ने बताया कि प्राचीन मंदिर में पहले समाज के न्यात पंचायत हुआ करती थी। मंदिर के विकास के लिए न्यात में भी यह निश्चित किया गया था कि प्रत्येक पुष्करणा ब्राह्मणों के परिवार में मांगलिक आयोजन होने पर मंदिर में कुछ ना कुछ भेंट दी जाएगी ताकि मंदिर का विकास हो सके।



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