जोधपुर. वन विभाग की ओर से पर्यावरण का किस तरह से मखौल उड़ाया जाता है अगर उसका उदाहरण देखना हो तो जोधपुर में मुख्यमंत्री के गृह नगर में ही नज़र आ सकता है। मंडोर के बेरीगंगा वन क्षेत्र में आठ साल पहले करीब 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगाए पांच हजार से अधि क पूरी तरह सूख चुके है। एएनआर मॉडल के तहत 62 वें राज्यस्तरीय वन महोत्सव में पौधे प्राकृतिक पुनर्ऊत्पादन बढ़ाने के लिए रोपित किए गए थे। प्रदेश के वर्तमान और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में इस आयोजन पर करोड़ों रुपए खर्च कर लंबी चौड़ी घोषणाएं भी की गई थी। रोपित पांच हजार पौधों की कुछ समय तक तो देखभाल की गई लेकिन सरकार बदलते ही किसी ने झांका तक नही। नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होने से पूरे पेड़ सूखते चले गए। किसी भी वन अधिकारी क्षेत्र में झांकना तक मुनासिब नहीं समझा।
पेड़ लगाने पर लाखो खर्च, नतीजा शून्य
बेरीगंगा वन क्षेत्र में पेड़ लगाने के नाम पिछले दो दशक में करोड़ों खर्च हो चुके है उसके बावजूद समूचे क्षेत्र में एक भी पेड़ हरा भरा नहीं है। बेरीगंगा वैन क्षेत्र के 25 हेक्टेयर में लगाए पौधे को पानी पिलाने के लिए बजट नही होने से मुख्यमंत्री के हाथों लगाया पौधा भी सूख चुका है।वर्ष 2012 में तत्कालीन और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नीम का एक पौधा लगाकर पूरे राज्य में 62 वें राज्यस्तरीय वन महोत्सव का आगाज किया था। लेकिन सरकार बदलते ही उनके हाथों से रोपित पौधा सूख चुका है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3iGYaBG
0 comments:
Post a Comment