जोधपुर. कोरोना संक्रमण ने जोधपुर की उड़ानें जमीं पर लाकर रख दी है। पिछले 4 महीने से जोधपुर में सभी फ्लाइट्स बंद हैं। अगले एक महीने यानी 24 अगस्त तक कोई भी फ्लाइट्स चलने की उम्मीद नहीं है। नागरिक उड्डयन निदेशालय से किसी भी एयरलाइंस कम्पनी ने जोधपुर से कनेक्टिंग शहरों का स्लॉट नहीं मांगा है। कम्पनियों को जोधपुर से यात्री भार काफी कम मिलता है। दो महीने बाद अक्टूबर में सर्दियों का पर्यटन सीजन शुरू होगा। कोरोना का संक्रमण अगर कम होता है तो उम्मीद है कि कोई एयरलाइंस कम्पनी आ जाएगी।
अन्य 5 शहरों में भी फ्लाइट्स की हालत पतली
प्रदेश में जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, किशनगढ़ और जैसलमेर में फ्लाइट्स संचालित हो रही है। बीकानेर, किशनगढ़, जैसलमेर उड़ान योजना के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से उनको पचास प्रतिशत सीटों की सब्सिडी दी जाती है। जैसलमेर से अगर प्रतिदिन 2-3 यात्री ही फ्लाइट में चढ़ते हैं तो भी फ्लाइट संचालित कर दी जाती है। उदयपुर में भी यात्री कम आ रहे हैं। वहां यात्री भार बढऩे पर 3-4 दिन में एक फ्लाइट चलती है। जयपुर राजधानी है। वहां 20 फ्लाइट्स में से हर रोज औसतन 10 फ्लाइट्स रद्द हो जाती है। विमान में लगभग 30 प्रतिशत सीटें ही भरती है, शेष जहाज खाली जाता है।
मार्च तक 24 फ्लाइट्स थी, अब सूना पड़ा है एयरपोर्ट
जोधपुर एयरपोर्ट से अक्टूबर 2019 से लेकर मार्च 2020 तक 24 फ्लाइट्स का संचालन हो रहा था। सरकारी कम्पनी एयर इंडिया के अलावा स्पाइस जेट, विस्तारा एयरलाइंस व इंडिगो दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे व बेंगलुरू के लिए फ्लाइट्स उड़ा रही थी। वैसे अधिकांश कम्पनियों का फ्लाइट शेड्यूल 30 मार्च तक ही था। रही सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी। अब एयरपोर्ट सूना पड़ा रहता था। कभी कभार कोई चार्टर प्लेन जरुर आ जाता है।
इंडिगो ने कर्मचारी आधे किए
जोधपुर में स्पाइस जेट और विस्तारा एयरलाइंस ने पहले से ही हाथ खड़े कर दिए हैं। एयर इंडिया में विनिवेश प्रक्रिया शुरू होने की वजह से वह भी यहां रुचि नहीं ले रही है। इंडिगो ने भी जोधपुर से अपना कामकाज समेटना शुरू कर दिया है। इंडिगो ने जोधपुर ऑपरेशन के लिए अपने कर्मचारी आधे कर दिए हैं।
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‘हम एयरलाइंस कम्पनियों से लगातार सम्पर्क में हंै। आज ही मैंने पत्र लिखकर जोधपुर से फ्लाइट्स चलाने को कहा है लेकिन कोरोना संक्रमण बढऩे, यात्री भार नहीं मिलने और एयरलाइंस कम्पनियों को घाटा होने से कोई कम्पनी यहां से स्लॉट मांगने से बच रही है।’
-जीके खरे, निदेशक, जोधपुर एयरपोर्ट
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