एक मां जिसने बेटों की जिदंगी बचाने के लिए गहने, जमीन तक बेच दी लेकिन आखिर बेटों को नहीं बचा सकी

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ओम टेलर. जोधपुर
सिलिकोसिस ने पहले पति फिर मेरे दो जवान बेटों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उनका इलाज करवाने के जमीन व गहने तक बेचे लेकिन उन्हें नहीं बचा सकी। दोनों बेटों की अकाल मौत ने मेरी बूढ़ी कमर ही तोड़ दी। सिलिकोसिस बीमारी से मरने वाले लोगों के आश्रितों को मिलने वाली सहायता राशि के लिए पिछले चार-पांच वर्ष में सरकारी कार्यालय के इतने चक्कर काटे की चप्पल घीस गए। लेकिन जिम्मेदारों का दिल नहीं पिघला।

यह दुखभरी कहानी है सोढ़ों की ढाणी वार्ड संख्या दो निवासी ६३ वर्षीय शांतिदेवी पत्नी मिश्रीलाल की। पहले पति मिश्रीलाल की सिलिकोसिस से मौत हो गई। उसके बाद बेटे प्रकाश की ११ जून २०१६ से सिलिकोसिस बीमारी से मौत हो गई। उसके गम से अभी उभरी ही नहीं थी कि दूसरे बेटे नरेश की भी २४ जून २०१८ को सिलिकोसिस के कारण मौत हो गई। सरकार की ओर से सिलिकोसिस बीमारी से मरने वाले लोगों के आश्रितों को तीन लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है लेकिन वृद्धा शांतिदेवी पिछले करीब चार वर्ष से अधिक समय से सरकारी कार्यालय के चक्कर काट परेशान हो रही है लेकिन उसे अभी तक सहायता राशि नहीं दी गई। ऐसे में उसे घर खर्च चलाने में  भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सिलिकोसिस व कैंसर ने छीना परिवार
पति मिश्रीलाल, बेटे प्रकाश व नरेश की सिलिकोसिस से तो बेटे कैलाश की कैंसर के कारण अकाल मौत होने से वृद्धा शांतिदेवी पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वृद्धा ने बताया कि वह खुद कैंसर पीडि़त है। इलाज चल रहा है। दो जवान बेटों को सिलिकोसिस के कारण खोना पड़ा लेकिन जिम्मेदार है कि उन्हें सरकारी सहायता से महरूम रख रहे है। सहायता राशि मिले तो बुढ़ापे में घर खर्च चलाने में आसानी रहे। वर्तमान में स्थिति यह है कि दो वक्त का भोजन भी दूसरों की सहायता से नसीब हो रहा है।

सिलिकोसिस मरीज मान एक लाख की सहायता दी अब...
वर्ष 2015 में सिलिकोसिस बीमारी के चलते जिला आपदा प्रबंध शाखा के आदेशानुसार २७ मार्च को एक लाख रुपए की सहायता राशि प्रकाश को दी गई। 11 जून 2016 को प्रकाश की मौत हो गई। इस दौरान प्रकाश का सिलिकोसिस अ प्रमाण पत्र कही खो गया। जिसके चलते प्रमाण पत्र ब शांतिदेवी नहीं बनवा सकी। इसके चलते अब प्रकाश को सिलिकोसिस मरीज नहीं माना जा रहा है। जिससे मृतक की एक मात्र आश्रित होने के बाद भी शांतिदेवी को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि से वंचित रहना पड़ रहा है।



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