जोधपुर. देश विदेश के शोधार्थियों को सवा लाख ग्रंथ और 30 हजार दुर्लभ पुस्तकों तथा 10 हजार पत्र पत्रिकाओं के लिए चंद मिनट में विषय संबंधित संदर्भ पुस्तकें सुलभ कराने के उद्देश्य से जोधपुर के प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान परिसर में आधुनिक संदर्भ पुस्तकालय निर्माण का कार्य 4 साल बाद भी अधूरा है। पिछले चार साल में चार अधिकारियों ने प्रतिष्ठान के निदेशक का पदभार संभाला लेकिन आधुनिक पुस्तकालय का कार्य पूरा नहीं हो सका। जबकि राज्य सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपए 4 साल पहले ही जारी कर दिए थे । वर्तमान में भी निदेशक का ही पद रिक्त पड़ा है। प्रतिष्ठान में सवा लाख ग्रंथों के अलावा इतिहास, ज्योतिष, आयुर्वेद, भक्ति, दर्शनशास्त्र, वेदपुराण, धर्मशास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, संगीत, कला संस्कृति आदि विषयों की 30 हजार दुर्लभ पुस्तकें तथा 10 हजार पत्र पत्रिकाएं उपलब्ध है। प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के पुराने पुस्तकालय का परिसर काफी कम होने से शोधार्थियों को संदर्भ पुस्तकों के अवलोकन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए वर्ष 2016-17 के राज्य बजट में नए संदर्भ पुस्कालय की घोषणा की गई थी । बजट घोषणा के अनुसार पुस्तकों को ऑन लाइन तो दूर अभी तक डिजिटलाइजेशन का कार्य पूरा नही हुआ है।
कोरोनाकाल में हो सकता है उपयोगी
आधुनिक संदर्भ पुस्तकालय बनने से देशी विदेशी शोधार्थियों के अध्ययन के दृष्टिगत सुविधाजनक होगा। खास तौर से कोरोनाकाल में इसका महत्व और भी बढ़ गया है। परिसर के 77 गुणा 128 फीट भूमि पर निर्मित पुस्तकालय में आधुनिक फर्नीचर, कम्प्यूटर, डेस्क, रेक्स, नेटवर्र्किंग, ऑडियो सिस्टम, फायर फाईटिंग सिस्टम, चित्रों को प्रदर्शित करने के लिए डिस्पले पैनल मय लाइट्स, सुलभ सुविधाएं, वाटर कूलर, शोधार्थी सामान लॉकर्स आदि वांछनीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। इसके लिए राज्य सरकार ने डेढ़ करोड़ की वित्तीय स्वीकृति वर्ष 2016 में जारी कर निर्माण एजेन्सी आरएसआरडीसी कार्य को पूरा करने का दायित्व सौंपा गया।
फर्नीचर में बदलाव करने से विलंब
संदर्भ पुस्तकालय का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। फर्नीचर के लिए अधिकारियों की कुछ और रिक्वायरमेंट होने से दो बार पुन: टेंडर लगाया भी गया लेकिन कोई आया नहीं था। अब टेंडर फाइनल हुआ है तो अगस्त माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
राजीव छाजेड़, एईएन, आरएसआरडीसी
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