20 साल बाद सोमवार और अमावस्या का संयोग

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जोधपुर. इस बार सावन में 20 साल बाद सोमवार को हरियाली और सोमवती अमावस्या का संयोग होगा। सावन के तीसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या सर्वार्थ सिद्धि योग और पुनर्वसु नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी । यह दिन अमावस्या दोष और पितृदोष की शांति के लिए शुभ दिन माना गया है। सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान देव दर्शन दान पुण्य करने की परंपरा है जिसका शास्त्रों में भी उल्लेख है लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। पंडित ओम दत्त शंकर के अनुसार 20 साल पहले 31 जुलाई को सावन मास में सोमवती अमावस्या और सर्वार्थसिद्धि योग बना था। अमावस्या तिथि 19 जुलाई को रात 12.09 से शुरू होकर 20 जुलाई रात 11 बजे तक रहेगी। इसमें पुष्यनक्षत्र रात्रि 9.20 बजे से दूसरे दिन मंगलवार सुबह 8.29 बजे तक रहेगा।

इस दिन पौधारोपण करना शुभ
यह पर्व हरा भरा खेत खलियान किसानों की समृद्धि और पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देता है। इस दिन पौधरोपण कर उन्हें संरक्षित करने का संकल्प लेना चाहिए। शास्त्रों में भी कहा गया कि सोमवती अमावस्या पर सभी को पौधरोपण अवश्य करना चाहिए । जो लोग अमावस्या पर पौधे नहीं लगा सकते वह 23 जुलाई को हरियाली तीज पर भी पौधरोपण कर सकते हैं । इस दिन शिव पूजन के साथ ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान, शिवमंत्र का जाप, पीपल के पेड़ का पूजन करना चाहिए।

यह परम्पराएं नहीं होगी इस बार
हरियाळी अमावस्या को भोगिशैल दर्शन की परम्परा इस बार कोरोना महामारी के कारण नहीं होगी। मंडोर में होने वाला वीरपुरी का मेला भी नहीं होगा। हरियाली अमावस्या को प्रतिवर्ष जोधपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के समूह बसों व निजी वाहनों के माध्यम से भोगिशैल की पहाडिय़ों में स्थित धार्मिक स्थलों के दर्शन करते है। लेकिन इस बार सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के कपाट बंद होने के कारण दर्शन की परम्परा नहीं निभाई जा सकेगी। मंडोर-उम्मेद उद्यान व अशोक उद्यान में सपरिवार पहुंचकर पिकनिक मनाने की परम्परा भी इस बार टूटेगी।



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