नौ साल से कागजों में अटकी काले हरिणों की 1432 बीघा जमीन

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नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. जिले के काले हरिणों और चिंकारों को संरक्षित करने के लिनंदकिशोर सारस्वतए जोधपुर जिले के गुड़ा विश्नोइयां में 1432 बीघा 9 बिस्वा भूमि को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने के 9 साल बाद भी नियमानुसार वनविभाग को भूमि का हस्तातंरण नहीं हो पाया हैं। नतीजन वन्यजीव बहुल क्षेत्र में नजर आने वाले काले हरिणों व चिंकारों के झुण्ड और अन्य प्रजातियों के वन्यजीव लगातार पलायन को मजबूर हो रहे है। गुड़ा क्षेत्र के काले हरिणों और चिंकारों के संरक्षण और प्राणी शास्त्रीय महत्व को देखते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने 15 दिसम्बर 2011 को जोधपुर जिले के गुड़ा ग्राम पंचायत के खसरा संख्या 710 व 753 की भूमि को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया था। इस बीच जेडीए की सीमाओं के विस्तार के कारण जमीन का राजस्व खाताधारक जेडीए बन गया। जेडीए से काले हरिणों की जमीन हस्तातंरण को लेकर पिछले नौ साल से सिर्फ कागजी पत्र व्यवहार होने से कई तरह के विकास कार्य थम गए है। क्षेत्र में जूलीफ्लोरा समूल नष्ट कर उस भूमि पर धामण घास लगाने की योजना भी फ्लॉप हो चुकी है। पत्रिका ने इस बारे में प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर सहित सभी संबंधित अधिकारियों से बातचीत का प्रयास किया लेकिन अधिकारी फोन उठाने से बचते रहे तो कुछ मौन बने रहे। वन विभाग की सैन्सस रिपोर्ट में जोधपुर जिले में काले हरिणों की संख्या 3067 बताई गई है जिनमें सर्वाधिक गुड़ा में ही विचरण करते है।

नियमानुसार हो जाते है अभयारण्य के नियम लागूू
गुड़ा विश्नोइयां में 15 दिसम्बर 2011 को करीब 2.31 किमी क्षेत्र कंजर्वेशन घोषित करने के साथ ही कंजर्वेशन रिजर्व घोषित की गई भूमि पर अभयारण्य की तरह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 ए (2 ) के प्रावधान की विभिन्न धाराएं लागू हो जाती है। वन क्षेत्रों के बाहर वन्यजीव बहुलता वाले क्षेत्र को विधिक रूप से संरक्षित होने के कारण न केवल वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों को संरक्षण बल्कि इॅको टूरिज्म से क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते है।

कंजर्वेशन क्षेत्र का विकास नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण
हजारों वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कन्जर्वेशन रिजर्व की 1432 बीघा जमीन नौ साल से कागजों में अटकना दरअसल सरकारी लाल फीताशाही और वन अधिकारियों की वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। लुप्त हो रहे कृष्ण मृग के लिए यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में जूलीफ्लोरा हटाकर, सुरक्षित दीवार और अन्य विकास कार्यों के लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-रामपाल भवाद
प्रदेशाध्यक्ष बिश्नोई टाईगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था



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