जोधपुर. टिड्डी ने भारत और पाकिस्तान में समर ब्रीडिंग शुरू कर दी है। राजस्थान में 15 से 20 जून को गुलाबी टिड्डी के साथ आई पीली टिड्डी ने बीकानेर, जोधपुर के ओसियां और बाड़मेर के सेड़वा में टिड्डी ने रेतीली जमीन के नीचे अंडे दिए हैं। कच्छ के रण से लगते पाकिस्तान के दक्षिण सिंध में स्थित नागापारकर क्षेत्र में भी टिड्डी के अण्डे मिले हैं। दो-तीन दिन पहले ही इनसे निम्फ यानी हॉपर निकले हैं। हॉपर बैंड को काबू करने के लिए सर्वे किया जा रहा है।
उधर संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने शनिवार रात बुलेटिन जारी कर भारत, पाकिस्तान, सूडान, दक्षिण सूडान, सोमालिया और इथोपिया में अगले 4 सप्ताह के लिए हाईअलर्ट घोषित किया है। इन सभी देशों में टिड्डी अण्डे देने के लिए तैयार है। इससे अगले 10-15 दिन में गुलाबी ऊर्जावान टिड्डी के बड़े दल सामने आएंगे।
नेपाल पहुंची टिड्डी
उत्तरप्रदेश के वाराणसी से टिड्डी नेपाल में घुस गई है। वर्ष 1962 में वहां पहली बार टिड्डी पहुंची थी। अब 1996 के बाद नेपाल के कृषि मंत्रालय ने सीमावर्ती जिलों बारा, सरलाई, परसा और रुपनदेही में टिड्डी की पुष्टि की है।
नमी से जल्दी निकले हॉपर
मानसून की नमी मिलने से एक पखवाड़े पहले कुछ युवा गुलाबी टिड्डी वयस्क पीली टिड्डी में बदलने लग गई। पीली टिड्डियों ने अण्डे दिए। एक टिड्डी बालू रेत में 10 से 15 सेंटीमीटर नीचे 100 से 150 अण्डे देती है। गर्मी व ज्यादा नमी से इन अण्डों से 7 से 10 दिन में ही हॉपर (फाके) निकल आए। जोधपुर, बाड़मेर और बीकानेर में सर्वे करके टिड्डी के हॉपर को ढूंढकर मारा जा रहा है।
सिंध घाटी में नए दल तैयार
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा में हॉपर बैंड के पंख निकलना शुरू हो गए हैं। इससे सिंध घाटी में गुलाबी टिड्डी के दल बन रहे हैं। इनसे भारत को सीधा खतरा है। ईरान के दक्षिण हिस्से में भी हॉपर बैंड हैं।
तारबंदी के नीचे से आएंगे हॉपर
विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान से लगती पाकिस्तान की सीमा में थार की रेतीली जमीन में टिड्डी के अण्डे देने पर ये तारबंदी के नीचे से होकर भारत में प्रवेश करेंगे। हॉपर के पंख नहीं होते हैं। ये रेंगकर चलते हैं। पिछले साल भी बॉर्डर पर यह दृश्य दिखा था।
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