सम्मान राशि नहीं लोकतंत्र की पुन: स्थापना के लिए सहा उत्पीडऩ : गहलोत

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जोधपुर. आपातकाल (1975-77) के लोकतंत्र सेनानियों के राज्य स्तरीय संगठन लोकतंत्र रक्षा मंच की ओर से गुरुवार सुबह रातानाडा स्थित माहेश्वरी जनोपयोगी भवन में आपातकाल की 45 वीं वर्षगांठ मनाई गई। अखिल भारतीय संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य राजेन्द्र गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोकतंत्र सेनानियों से कहा कि 45 साल पूर्व इसी दिन लोकतंत्र की हत्या कर दी गई थी। उसी लोकतंत्र के संरक्षण और पुन: स्थापना के लिए सभी ने मिलकर संघर्ष और करीब 21 माह तक उत्पीडऩ और अत्याचार सहा। सभी लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन करते हुए गहलोत ने कहा कि आपातकाल का संघर्ष किसी मायने में स्वतंत्रता संघर्ष से कम नहीं था। प्रदेश में जब भाजपा सरकार थी तब तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान राशि से सम्मानित करने की घोषणा कि लेकिन सरकार बदलते ही सरकार ने यह सम्मान राशि को रोक दिया गया। सम्मान सरकार ने दिया था। हम साफ तौर पर कहना चाहते है कि हम किसी सम्मान राशि के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र की पुन: स्थापना के लिए उत्पीडऩ सहा था। गहलोत ने कहा कि राज्यसभा में लोकतंत्र सेनानियों की आवाज बनेंगे और सम्मान राशि के संदर्भ में जल्द ही केन्द्र सरकार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में मंच के प्रमुख संरक्षक एवं यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष दामोदर बंग, मंच के प्रांतीय महामंत्री देवराज बोहरा ने आपातकाल के संस्मरण को साझा किया। कार्यक्रम में मंच के जिलाध्यक्ष किशनदास बिड़ला, ब्रह्मदेव बोड़ा, कानराज मोहनोत, घनश्याम डागा,महेन्द्र कांकरिया, जगदीश पुरोहित, देवेन्द्र आर्य, गोपाल सुराणा, ओम पुंगलिया, नंदू शाह सहित जिले के लोकतंत्र सेनानी मौजूद रहे। संचालन जुगल तापडिया ने किया ।

जंगे आजादी का संघर्ष विदेशी और आपातकाल देशी शासकों के साथ
राज्यसभा सदस्य राजेन्द्र गहलोत ने कहा कि आपातकाल 1975-77 का संघर्ष किसी भी मायने में स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष से कम नहीं था बल्कि देश में लोकतंत्र पुन: बहाली के लिए वह संघर्ष स्वदेशी शासकों जबकि देश की आजादी का संघर्ष विदेशी शासकों के साथ था। उन्होंने कहा की अकारण ही देश के लाखों निर्दोष लोगों को आपातकाल के नाम पर जेल में डाल दिया गया उन पर अत्याचार किए गए प्रताडऩा दी गई और यह सब अत्याचार हमने सहन किए । गहलोत ने कहा कि उनके राजनीतिक यात्रा में सभी कार्यकर्ताओं राजनीतिक मित्रों के सहयोग से राज्यसभा में पहुंचे हैं अब सभी के प्रतीक के रूप में लोकतंत्र सेनानियों की आवाज बनेंगे।



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