पंचायत समिति पीपाड़सिटी : गांव बने त्रिशंकू, ग्रामीण बने घनचक्कर!

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पीपाड़सिटी (जोधपुर). उपखंड क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं जिनकी कभी राज्य की राजनीति में अपने दिग्गजों के कारण विशिष्ट पहचान थी। लेकिन आज वही गांव प्रशासनिक और विकास की दृष्टि से त्रिशंकु बन रह गए हैं और ग्रामीणों को अपने सरकारी कामों और योजनाओं को लेकर कभी दो-दो पंचायत समिति के बीच चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे में विकास के साथ सुलभ न्याय के लिए ग्रामीणों को लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत बदलते रहते हैं, लेकिन पंचायत समिति और उपखंड मुख्यालय के बावजूद ग्रामीणों को दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़े ये आज के युग में किसी पीड़ा से कम नहीं हैं। एक कार्य के लिए कई ग्रामीणों को बिलाड़ा,पीपाड़ सिटी और भोपालगढ़ के बीच सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

इस असंतुलन को खत्म करने के लिए ग्रामीणों की कई वर्षों से मांग को भी सरकारें अनसुना कर रही हैं। ऐसे में सरकार के विकास कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं। कहने को राज्य सरकार ने ऐसे गांवों के प्रशासनिक और अन्य सरकारी असंतुलन को समाप्त करने के लिए भटनागर समिति का गठन किया था। जिसने अपनी रिपोर्ट में पंचायत समिति को इकाई मान कर सभी सरकारी विभागों का एक ही क्षेत्राधिकार का सुझाव दिया। लेकिन राजनीतिक दंगल के चलते उस रिपोर्ट का लागू ना हो पाना ही ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया।

ये गांव बने त्रिशंकु
पंचायत समिति क्षेत्र का तिलवासनी गांव कद्दावर राजनेता और कई बार मंत्री रहे दिवंगत रामसिंह बिश्नोई और लूणी विधायक महेंद्र बिश्नोई का पैतृक गांव है। खारिया खंगार गांव राज्य के पुलिस महानिदेशक बीएल सोनी का गांव होने के साथ बिड़ला व्हाइट सीमेंट के संयंत्र के कारण चर्चित और पावरफुल माना जाता है।

इसी प्रकार रतकुडिय़ा गांव राज्य के पहले किसान वर्ग के आइएएस गोरधन सिंह व भाजपा के कद्दावर किसान नेता और राज्यसभा के पूर्व सांसद रामनारायण डूडी का पैतृक गांव होने के साथ पूर्व राज्य मंत्री कमसा मेघवाल का ससुराल भी हैं। इसके साथ बोयल,सिलारी व खेड़ी सालवा भी प्रशासन और पुलिस के साथ न्यायिक क्षेत्र में भी ना घर के और ना घाट के बने हुए हैं।


पंचायत समिति के गांवों के हालात

क्षेत्र के पालडीसिद्धा, खारिया खंगार,खांगटा,रतकुडिय़ा,पानी कनेक्शन के साथ चिकित्सा व महिला बाल विकास विभागों के कार्यों के लिए भोपालगढ़, तिलवासनी,सिलारी के लोग बिजली-पानी के लिए बिलाड़ा जाना पड़ता है। ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, ब्लॉक आयुर्वेद अधिकारी, सीडीपीओ,सीएमएचओ के लिए पंचायत समिति के ग्रामीणों को बिलाड़ा या भोपालगढ़ जाना पड़ता है।

सरकार के राजकोष पर बोझ
पंचायत समिति क्षेत्र में प्रशासनिक असंतुलन से सिर्फ ग्रामीण ही नहीं अधिकारी भी परेशान हैं। पीपाड़ सिटी में पद स्थापित अनेक विभागों के अधिकारियों को पुलिस सहायता,प्रशासनिक आदेश प्राप्त करने के साथ उपखंड व पंचायत समिति की बैठकों में उपस्थित होने के लिए बिलाड़ा या भोपालगढ़ जाना पड़ता है। इससे सरकारी वाहनों के डीजल खर्च के साथ अधिकारियों के यात्रा भत्ता का भार भी राजकोष पर बढ़ जाता हैं। इस समस्या को देखते हुए भटनागर समिति ने वर्षों पहले पंचायत समिति क्षेत्र को ही सभी विभागों का क्षेत्राधिकार बनाने की राज्य सरकार को सिफारिश की थी। जो राजनीतिक दांवपेंच के चलते फाइलों में दब गई।


इनका कहना है

ग्रामीणों को राहत देने के लिए मूलभूत सुविधाओं से जुड़े विभागों का पंचायत समिति क्षेत्राधिकार करना राज्य सरकार का दायित्व है, इससे प्रशासनिक संतुलन कायम होने के साथ ग्रामीण की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकता हैं।
-अर्जुनलाल गर्ग, पूर्व राज्य मंत्री,विधि एवं संसदीय मामलात विभाग,बिलाड़ा।


ये हैं ग्राम पंचायतें

1. खारिया खंगार ग्राम पंचायत
आबादी-7257

उपखंड-भोपालगढ़,
पुलिस थाना-बोरुंदा

पंचायत समिति-पीपाड़सिटी।
न्यायालय-पीपाड़सिटी।


2. रतकुडिय़ा ग्राम पंचायत

आबादी-6448
उपखंड-भोपालगढ़,

पुलिस थाना-पीपाड़सिटी
पंचायत समिति-पीपाड़सिटी।

न्यायालय-पीपाड़सिटी।

3. तिलवासनी ग्राम पंचायत
आबादी-4066

उपखण्ड-पीपाड़सिटी,
पंचायत समिति-पीपाड़सिटी।

पुलिस थाना-बिलाड़ा।
न्यायालय-बिलाड़ा।


4. बोयल ग्राम पंचायत

आबादी-7023
उपखंड-पीपाड़सिटी,

पंचायत समिति-पीपाड़सिटी,
पुलिस थाना-बिलाड़ा।

न्यायालय-बिलाड़ा।



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