जोधपुर में जैन संत और मुनिवृंद ने किया सादगीपूर्ण तरीके से चातुर्मास मंगलप्रवेश

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जोधपुर. सूर्यनगरी के विभिन्न क्षेत्रों में 4 जुलाई से आरंभ हो रहे जैन चातुर्मास के लिए साध्वीवृंद एवं जैन साधु-संतों व मुनियों का चातुर्मास स्थलों पर प्रवेश शुरू हो गया है। प्रमुख जैन संत कमलमुनि 'कमलेशÓ ने रविवार को जैन मुनियों के साथ नेहरू पार्क स्थित महावीर भवन में सादगीपूर्ण तरीके से चातुर्मास प्रवेश किया। वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के सीमित श्रावकों के जयकारों के बीच जैन संत और मुनिवृंद शास्त्री नगर सी सेक्टर से विहार कर प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए चातुर्मास स्थल पहुंचे। चातुर्मास मंगलप्रवेश के बाद धर्मसभा में संत कमलमुनि ने कहा कि आंतरिक चेतना का विकास धन वैभव और सरकार सत्ता भी नहीं कर सकती वह तो सिर्फ महापुरुषों के ज्ञान से ही संभव है। उन्होंने कहा कोरोना जैसी महामारी को हराने के लिए अदम्य साहस चाहिए । तपस्या भक्ति और साधना रूपी सुरक्षा कवच को अपनाकर उसे बचा जा सकता है सावधानी बनाए रखना ही सबसे बड़ी दवा है। धर्मसभा में 98 वर्षीय मूर्तिपूजक जैनाचार्य राजतिलक सूरिश्वर ने आशीर्वचन में कहा कि प्रेम करुणा और सद्भाव का संचार प्राणी मात्र में हो यही चातुर्मास का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए । जितना राग द्वेष कम होगा उतनी साधना में निर्मलता आएगी। धर्मसभा के प्रारंभ में घनश्याम मुनि, अरिहंत मुनि व कौशल मुनि ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया। संघ के सुकनराज धारीवाल, सुनील चोपड़ा, गुणवंत मेहता, सुरेश पारेख, अशोक गोलेछा, नरेंद्र संचेती, त्रिशला महिला मंडल, वर्धमान जैन महिला मंडल तथा जैन ज्योति महिला मंडल की ओर से गुरुजनों का सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए अभिनंदन किया गया।

जैनाचार्य विजय राजतिलक का चातुर्मास प्रवेश 30 को
जैन आचार्य वयोवृद्ध संत विजय राजतिलक और उनके शिष्य बाल मुनि विजय मोक्ष तिलक 30 जून को भैरुबाग पाŸवनाथ जैन श्वेताम्बर तीर्थ में चातुर्मास के लिए सादगीपूर्वक मंगल प्रवेश करेंगे। संत मोक्षतिलक ने बताया कि 30 जून को सुबह 9 बजे न्यू पॉवर हाउस रोड पर सेक्शन 7 से आचार्य विहार कर भैरुबाग आएंगे। मरुधर मणि की उपाधि से विभूषित विजय राजतिलक महाराज 18 भाषाओं के ज्ञाता और जैन शास्त्रों के अनुसंधान कर्ता है। उनके चातर्मास प्रवास को लेकर जैन समाज के श्रावकों में उत्साह है। चातुर्मास के दौरान स्वाध्याय पर विशेष बल रहेगा।



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