पाकिस्तान से आए इस पक्षी को देख सभी रह गए हैरान, जोधपुर में मिला इसको नया जीवनदान

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वीडियो : मनोज सैन/स्टोरी : नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. लॉक डॉउन में भारतीय सीमा पार कर पहुंचे दुर्लभ पक्षी तिलोर ( होबारा बस्टर्ड) को जोधपुर में नया जीवन मिला है। गोडावण की तरह दिखने वाला और गोडावण की तरह विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे तिलोर पक्षी शीतकाल में भारत के जैसलमेर बीकानेर और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में आते है। पाकिस्तान में इसका शिकार बहुतायत से होने के कारण धीरे-धीरे यह प्रजाति लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। पाकिस्तान में वर्ष 2014 में 2100 होबारा बस्टर्ड का शिकार होने के बाद वहां की सुप्रीम कोर्ट ने इसके शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन उसके बाद भी वहां अरब के शेख खासतौर पर इसके शिकार के लिए आते हैं। घायल पक्षी दुर्लभ होने के कारण उसकी विशेष निगरानी रखी जा रही है। तिलोर घास, बीज और कीड़े-मकोड़े खाता है।

बीएसएफ जवानों ने पकड़ा
सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने तिलोर को जैसलमेर के पुलिस थाना नाचना के सीमावर्ती बाहला गांव के पास भूंगरी सीमा चौकी क्षेत्र में पकड़ा था और पक्षी के पैरों में तीन टैग लगे हुए थे। सीमा सुरक्षा बल ने उनके पैरों में लगे टैग उतार कर जब्त कर लिए जिन्हें जांच के लिए भेजा गया । टैग से पता चला की घायल तिलोर अबु धाबी स्थित कृत्रिम तिलोर प्रजनन केंद्र के है। पकड़े गए घायल पक्षी को वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया जहां से 9 अप्रैल को जोधपुर वन्यजीव चिकित्सालय रेफर किया गया। वन्यजीव चिकित्सक डॉ श्रवण सिंह व चिकित्सा सहायक महेंद्र गहलोत ने उपचार शुरू किया।

किसी को पास जाने की इजाज़त नही
मादा तिलोर को कड़ी सुरक्षा में एसडीएस विशेष खाद्य पदार्थ, रिज़गा,उबले अंडे,मीट पीस,मतीरा और बारीक कंकर भोजन के रूप में दिया जा रहा है। चिकित्सक स्टाफ के अलावा किसी को पास जाने की अनुमति नही है। मुख्य वन संरक्षक प्रियरंजन और उपवन संरक्षक महेश चौधरी ने बताया की घायल तिलोर के पंखों की ऐरो डायनेमिक जांच के बाद स्वस्थ पाए जाने पर आगामी शीतकाल में पुनः सीमा क्षेत्र में स्वतंत्र कर दिया जाएगा।

पक्षी की फैक्ट फ़ाइल

वैज्ञानिक नाम : कलमयदोटिस मैकेएनी
बस्टर्ड समूह का एक मध्यम आकार का पक्षी
विचरण क्षेत्र : मध्य एशिया के अरब क्षेत्र से पश्चिमी राजस्थान तक
प्रवासकाल : भारत में नवंबर से मार्च अंत तक

परियोजना : ईआरडीएस फाउंडेशन संस्थान के सामुदायिक गोडावण संरक्षण परियोजना के अंतर्गत युवा वन्यजीव प्रेमी स्वयंसेवक पिछले 2 वर्ष से इसके आने और विचरण के इलाकों की कर रहे मैपिंग



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