श्रद्धा से मनाई निर्जला ग्यारस, कोरोना के चलते वीरान नजर आए जोधपुर के कई धार्मिक स्थल

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वीडियो : गौतम उडेलिया/जोधपुर. निर्जला एकादशी पर्व सूर्यनगरी में मंगलवार को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने 'भीमसेनी एकादशी' कही जाने वाली निर्जला ग्यारस को अपनी शारीरिक क्षमता व सामथ्र्यनुसार आंशिक व पूर्ण रूप से निर्जल उपवास रखने की परम्परा का निर्वहन किया। धार्मिक-सामाजिक संगठनों की ओर से सूर्यनगरी की प्रमुख गोशालाओं और श्रमिक बस्तियों में जरूरत की चीजें और ऋतु फलों का वितरण किया।

कोरोना संक्रमण के कारण शहर के धार्मिक स्थलों के बाहर और मुख्य मार्ग पर शीतल पेय पदार्थ के रूप में मिल्क रोज, ठंडई, गन्ने का रस, छांछ, लस्सी, नीम्बू की शिकंजी वितरण जैसे आयोजन इस बार नजर नहीं आए। निर्जला एकादशी को पवित्र स्नान की मान्यता के बावजूद बेरीगंगा तीर्थ पूरी तरह वीरान रहा। पुजारी मनीष ओझा ने बताया कि धार्मिक स्थल बंद होने के कारण श्रद्धालु नहीं पहुंचे।

इस माह श्रेष्ठ मुहूर्त में चूके तो कुंवारों को करना पड़ेगा नवम्बर तक इंतजार
नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. कुंआरों के लिए जून माह अनलॉक-वन की पाबंदियों को हटाने के साथ विवाह के तीन मुहूर्त की सौगात भी लेकर आया है। यदि सगाई हो चुके कुंआरे जून मास में विवाह से चूक जाते हैं तो उन्हें करीब पांच माह तक विवाह के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। प्रमुख ज्योतिषियों के अनुसार 31 मई को शुक्र का तारा अस्त होने से 8 जून के बाद विवाह के मुहूर्त होने से विवाह किए जा सकते है। देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आखातीज पर स्थगित हुए एक हजार से अधिक वैवाहिक कार्यक्रम की शहनाई अब अनलॉक-वन में हटी कई पांबदियों के कारण जून माह मे गूंज सकती है। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि 29 जून को अबूझ सावा भड़ली नवमी (सुनम) को नौ रेखी सावा है। इसी माह 15 जून और 30 जून को आठ रेखी विवाह के भी मुहूर्त है।



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