जोधपुर. एक ओर जहां सरकार पाक विस्थापतों को विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए नोटिफि केशन्स जारी किए है लेकिन जमीनी हकीकत पर अभी भी कई मूलभूत समस्याओं को झेलना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न बस्तियों में घासफूस के तिनकों से अपना आशियाना बनाकर जिंदगी बसर कर रहे लोगों के बच्चों को शिक्षा तक की सुविधा नहीं है। नागरिकता के अभाव में केन्द्र व राज्य सरकार की बीपीएल लोगों के लिए संचालित किसी भी योजना अथवा जातीय आरक्षण का कोई लाभ विस्थापितों को नहीं मिलता है। यहां तक नरेगा में मिलने वाले रोजगार से भी वंचित रहना पड़ रहा है। पिछले 15 सालों में पाकिस्तान से आने वाले विस्थापितों में 80 प्रतिशत से अधिक संख्या एससी एसटी के लोगों की है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर व पिछड़े वर्ग के हैं । नागरिकता के अभाव और कोरोनाकाल जैसी महामारी में रोजगार से वंचित विस्थापितों को बैंक खाते खोलने से लेकर पारिवारिक आजीविका केलिए छोटा मोटा व्यापार और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने तक की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
फैक्ट फाइल
30 हजार राजस्थान में कुल पाक विस्थापित
15 हजार जोधपुर में
9 हजार विस्थापित पुराने नागरिकता देने के नियमानुसार पात्र
17 हजार नए सीएए बिल के आधार पर नागरिकता के पात्र
पाकिस्तान में हर साल एक हजार हिन्दू बच्चियों के साथ जबरन शादी
पाकिस्तान में छोटी उम्र की हिंदू बच्चियों को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन करके शादी करवाई जाती है । यह बहुत बड़ा कारण है जिसके लिए पाक में रहने वाले हिंदू भारतीय पलायन करने पर मजबूर होते हैं । पाकिस्तान के ह्यूमन राइट्स कमिशन के अनुसार हर साल 1000 से अधिक छोटी उम्र की नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन करके शादियां कराई जाती है। पाकिस्तान में किसी हिंदू लड़की के पिता का रहना संभव ही नहीं है और भारत में नागरिकता देने की प्रक्रिया जटिल होने से कोरोनकाल जैसे हालात में विस्थापितों की हालत 'आसमान से टपके खजूर में अटकेÓ जैसी हो गई है । हम आशा करते हैं सरकार इस मुद्दे को सच्चाई से मानवीय आधार पर सभी पात्र विस्थापितों को तुरंत नागरिकता देगी। नागरिकता लेने के योग्य हैं उन्हें नियमानुसार राहत मिलनी चाहिए।
हिन्दूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष सीमान्त लोक संगठन
दो दशक बीते लेकिन नहीं मिली नागरिकता
डॉ. नूर भील को पाकिस्तान से आए 20 साल से अधिक समय हो गया है । पिछले 10 सालों में भारतीय नागरिकता के इंतजार में है। अब तक चार बार नागरिकता फार्म भी भरवाया गया लेकिन उन्हें और उनके परिवार को नागरिकता कब मिलेगी पता नहीं है। डॉक्टर नूर भील भील भील विस्थापित समुदाय के एकमात्र एमबीबीएस डॉक्टर है।
नागरिकता मिली तो पाई सरकारी नौकरी
पाकिस्तान में जन्मे प्रकाश पंवार को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद कुछ महीने पहले विद्युत विभाग में नौकरी भी मिल चुकी है । पंवार की तरह पिछले कुछ महीनों में जोधपुर में रहने वाले ऐसे पांच व्यक्तियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
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