जोधपुर. कोरोना के कोहराम में जागरूकता और सावचेती को हथियार बनाकर जोधपुर के शिकारगढ़ स्थित आशापूर्णा नैनोमेक्स व एवेन्यू के वाशिंदे अभी तक इससे दूर है। यहां के प्रत्येक वाशिंदे ने लॉकडाउन से लेकर अनलॉक-01 तक इस जंग में इस तरह मोर्चा संभाला कि यहां फिलहाल एक भी संक्रमित नहीं आया। करीब 450 परिवारों के रहवासीय इस कॉलोनी में काढ़ा वितरण, लोगों की बेवजह आवाजाही रोकने से लेकर मजदूरों की पीड़ा को भी शिद्दत से महसूस कर उन्हें राहत सामग्री पहुंचाई।
यह भी रहा सराहनीय
कॉलोनी में रह रहे कोरोना के कर्मवीरों का सम्मान किया गया। मसलन चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी। एक नर्सिंगकर्मी का मुख्य द्वार पर माल्यार्पण कर तालियां बजाकर स्वागत किया गया।
मजदूरों की पीड़ा को समझा
कॉलोनी में कई मकान निर्माणाधीन है। यहां कई मजदूर भी रहते हैं। ऐसे में अचानक लॉकडाउन होने से उन मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट हो गया। कॉलोनी के निवासियों ने अपने-अपने स्तर पर उन्हें राशन सामग्री के किट मुहैया करवाए। वहीं, रास्ते की सफाई, बबूल की कंटीली झाडिय़ां हटाने सहित कई छोटे-बड़े कार्य करवाए ताकि आर्थिक मदद मिल सके।
ऐसे किया बचाव
लॉकडाउन में बेवजह लोगों की आवाजाही रोकने के लिए मुख्यद्वार पर कॉलोनीवासियों ने बारी-बारी से छह-छह घंटे समूह में पहरा दिया।
मुख्य द्वार पर सैनटाइजर व साबुन की व्यवस्था की गई।
दो-तीन मर्तबा टे्रक्टर से नैनोमैक्स, एवेन्यू, नैनो ग्रांड व रेजिमेंट को सैनिटाइज किया गया।
अवांछित लोगों की आवाजाही रोकने के लिए पीछे के द्वार को बबूल की झाडिय़ां डालकर बंद कर दिया।
कॉलोनी में कई बार काढ़े बनाया और उसका वितरण किया। युवाओं को योग सिखाने के लिए कुछ पूर्व सैनिक आगे आए।
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