जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एहतियात बरतते हुए राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आजीविका का नुकसान होने के कारण प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों को भुखमरी का सामना न करना पड़े। कोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों की सभी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी को लेकर आ रही समस्याओं के समाधान को लेकर याचिकाकर्ता हरिसिंह राजपुरोहित द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार को फैसला सुनाते हुए खंडपीठ ने कहा कि हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज एक जनहित याचिका में प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने उन बिंदुओं पर हस्तक्षेप नहीं करते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों को भोजन, आश्रय और अन्य सुविधाएं, जो पहले से ही अपने मूल स्थानों पर पहुंच चुके हैं, निसंदेह कल्याणकारी राज्य के लिए एक सामाजिक व्यवस्था को सुरक्षित करने के दायित्व के अधीन है और सभी नागरिकों को समान रूप से आजीविका के पर्याप्त साधनों की उपलब्धता होनी चाहिए। कोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के संबंध में प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए राज्य को अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीति बनाने का प्रयास करने को कहा है, विशेषकर उन श्रमिकों के लिए जो अनलॉक के बाद विभिन्न राज्यों में अपने कार्य स्थानों पर वापस जाने का इरादा नहीं रखते हैं।
पंजीकृत श्रमिकों के मुकाबले कम की आवक हुई
कोर्ट ने कहा कि रेलवे की गाइडलाइन के अनुसार श्रमिक विशेष ट्रेनों के लिए श्रमिक जिन राज्यों में रोजगार मेें नियोजित थे, वहां की सरकार को श्रमिकों के मूल राज्यों से परामर्श करके आवश्यकता का आकलन करना था और टे्रनों की जरूरत के लिए नोडल अधिकारी को सूचित करना था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यह संदेह नहीं किया जा सकता कि राज्य सरकार ने दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य नहीं किया और दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की आवक को आसान बनाने का प्रयास नहीं किया, लेकिन 17 मई तक केवल 28,490 प्रवासी श्रमिकों को ही विभिन्न राज्यों से राजस्थान लाया गया था, जबकि 11,53,862 प्रवासी श्रमिक विभिन्न राज्यों से राजस्थान आने के लिए पंजीकरण करवा चुके थे।
राज्य को पहल करनी चाहिए
खंडपीठ ने कहा कि यदि श्रमिक नियोजन वाले राज्य पहल नहीं कर रहे और विभिन्न राज्यों से फंसे हुए प्रवासी कामगारों के परिवहन के लिए अपेक्षित संख्या में टे्रन संचालन में तत्परता नहीं दिखा रहे, तो राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि वह शीघ्रता सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित उपाय करे और परिवहन के अन्य साधनों का सहारा लेकर विभिन्न राज्यों से प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध करवाए। फंसे हुए प्रवासी कामगारों के सामने आने वाली समस्या एक मानवीय समस्या है, जिसे राज्य के सभी अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर जिम्मेदारी से निस्तारित करना चाहिए।
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