जोधपुर. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का नकरात्मक प्रभाव इंसानों के साथ पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान पशु-पक्षी अजीबों गरीब हरकतें करने लगते हैं। जोधपुर के कायलाना रोड स्थित माचिया जैविक उद्यान में रविवार को सूर्यग्रहणकाल के दौरान कुछ प्रमुख वन्यजीवों की हरकतों में भी काफी बदलाव नजर आया। ग्रहण शुरू होने के कुछ देर बाद ही रोजाना कुलांचे भरने वाले चिंकारे शांत अवस्था में बैठे रहे तो स्टार वन्यजीव टाइगर 'एंथोनीÓ पेड़ के नीचे सुस्ताता रहा। शेरनी 'अम्बिकाÓ सुबह 11.10 बजे शेल्टर हाउस से बाहर आने के कुछ देर तक साथी एंथोनी के पास खड़ी रही। एन्क्लोजर में घूमते हुए करीब 11.30 बजे शेरनी ने अचानक जलकुण्ड में छलांग लगा दी और काफी देर तक अकेले ही पानी में शांत मुद्रा में बैठी रही। जब शेरनी जलकुण्ड में बैठी थी तभी बिलकुल करीब टिटहरी (रेड वेटल्ड लेपविंग ) पक्षी भी वहां प्यास बुझाने पहुंचा लेकिन शेरनी उस पर हमले की जगह उसे एकटक देखती रही। इस दौरान टाइगर एंथोनी पेड़ के नीचे से उठकर जम्हाइयां लेते नजर आया। लॉयन जीएस और लॉयनेस आरटी और पैंथर परिवार भी एन्क्लोजर में शांत मुद्रा में बैठे नजर आए जबकि हिमालयन भालू भी जलकुण्ड में अठखेलियां करने पहुंचा।
व्यवहार में आ जाती है सुस्ती
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सुमित डूकिया के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय वन्यजीवों के व्यवहार में आकस्मिक बदलाव देखे जाते है। दुनिया भर में बहुत से उदाहरण मौजूद है जहां मकड़ी से लेकर चिंपैंजी तक पर शोध के आंकड़े वैज्ञानिक पत्रिकाओं में उपलब्ध है। ग्रहणकाल में रात्रिचर प्राणी सजग और सचेत हो जाते है वहीं दिनचर प्राणियों में अपने व्यवहार में सुस्ती देखी जाती है। क्योंकि ये पूरी खगोलीय घटना अल्पकालीन होती है । इसलिए इस प्रकार के व्यवहार को अधिकतर बहुत कम ही दर्ज किया गया है। ग्रहण के समय बहुत से जानवर समझ ही नहीं पाते ये क्या हो गया और वो अपने घर की चल पड़ते हैं। सूर्य ग्रहण के समय वन्यजीवों के व्यवहार में असामान्य घटनाएं होती हैं।
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