बिलाड़ा (जोधपुर). स्थानीय प्रशासन एवं कस्बेवासियों के आपसी समन्वय का परिणाम रहा कि तीन माह में कस्बे में एक भी कोविड-19 से संक्रमित नहीं हुआ। जिन लोगों के संक्रमित होने की आशंका थी उनकी रिपोर्ट भी नेगेटिव आई। कस्बे में सौ से अधिक श्रमिक लौटे हैं जिनको आइसोलेट किए जाने के बाद वे सभी स्वस्थ पाए गए।
नगर पालिका प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी पार्षदों ने भी कोविड-19 से नगर वासियों को बचाए रखने के लिए सभी प्रयत्न किए हैं इसके लिए जिला प्रशासन ने नियम लागू किए। समय-समय पर कस्बे के गली-मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिडक़ाव करवाया गया। सैकड़ों की संख्या में मास्क वितरित किए गए। लोगों को सेनेटाइजर से हाथ धोते रहने की हिदायत दी गई और जिला प्रशासन की ओर से लगाई गई धारा 144 की पालना करवाई गई।
प्रवासियों का हुआ स्वागत, समझाए नियम
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु ,आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न प्रदेशों से प्रवासी श्रमिकों का यहां आने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस तरह करीब सत्रह सौ प्रवासी कस्बे में आए। कस्बे के सभी मार्गों पर लगी चौकियों के कर्मचारियों ने उनका स्वागत करने के साथ ही उन्हें 14 दिन क्वॉरंटीन में रखा। नियमों की पालना नहीं करने वाले के प्रति सख्ती बढ़ती गई। जिन दुकानदारों ने मनाही के बावजूद दुकान खोली, अधिशासी अधिकारी हरीश चंद गहलोत ने संबंधित दुकान सीज करने के साथ जुर्माना भी वसूला।
एक आरोपी के कारण शंका हुई
अधिवक्ता नारायण सिंह राठौड़ की हत्या का एक आरोपी जिसे पाली पुलिस की ओर से कार्रवाई की गई जांच में संक्रमित पाया गया था लेकिन वापस कोरोना की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। इसी बीच स्थानीय प्रशासन ने उक्त आरोपी के घर वाले व संपूर्ण क्षेत्र को कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित कर दिया था। उसके करीबी लोगों की रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है। इस तरह तीन महीनों के दौरान कस्बे वासियों और प्रशासन में आपसी समन्वय का परिणाम रहा कि कोविड-19 को हारना पड़ा।
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