जोधपुर. अरब व अफ्रीका के रेगिस्तान से आने वाली टिड्डी का जैसलमेर जिले में सेना का पोकरण फायरिंग रेंज हॉट स्पॉट है। यहां एक समय में अरबों टिड्डी आकर बैठती हैं। बालू रेत, धोरे, वनस्पति के कारण नमी और मानव दखल कम होने से टिड्डी की सभी पीढिय़ां यहां अपने अण्डे जरुर देती हैं। टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) की टीमों द्वारा यहां टिड्डी मारने के लिए सेना से बार-बार अनुमति लेनी पड़ती है इसलिए यहां टिड्डी खूब फलती-फूलती है। पिछले साल भी पूरे राजस्थान से टिड्डी चली गई थी लेकिन फायरिंग रेंज में निकालने में तकनीशियनों को मशक्कत करनी पड़ी।
वैसे देश में राजस्थान के 6 जिले हॉट स्पॉट है। रेगिस्तानी टिड्डी इन्हीं छह जिलों जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, बीकानेर और नागौर में प्रजनन करती है। अण्डे देती है। हवा के साथ दूर-दूर तक उडऩे के बावजूद अपने सेंसर की मदद से यह वापस हॉट स्पॉट में आ जाती है। हॉट स्पॉट के क्षेत्रों में ही एलडब्ल्यूओ ने अपने कार्यालय बनाए हैं ताकि इन्हें वहीं पर नियंत्रित किया जा सके।
यह हैं टिड्डी के हॉट स्पॉट
बाड़मेर- चौहटन, गडरा रोड
जैसलमेर- फतेहगढ़, पोकरण, फायरिंग रेंज, लाठी क्षेत्र
बीकानेर- पुगल, खाजूवाला, रणजीतपुरा
जोधपुर- फलोदी, लोहावट, बाप, देचू
नागौर- खींवसर
श्रीगंगानगर- हिंदूमल कोट
फलोदी नहीं छोड़ रही टिड्डी
इस सप्ताह पाकिस्ताान से कोई नया टिड्डी दल नहीं आया है लेकिन फिर भी जोधपुर के फलोदी में टिड्डी खत्म नहीं हो रही है। यहां 17 मई से लगातार टिड्डी पर पेस्टीसाइड स्प्रे जारी है। बाड़मेर, जैसलमेर और नागौर से घूमकर टिड्डी वापस यहां आकर बैठ जाती है।
सिंध घाटी है पाकिस्तान में हॉट स्पॉट
पाकिस्तान में पंजाब प्रांत से लगती सिंधु घाटी टिड्डी का हॉट स्पॉट है। इसके अलावा सिंध प्रांत में चोलिस्तान, नारा व थारपारकर रेगिस्तान हॉट स्पॉट है। अप्रेल 2019 में पाकिस्तान में टिड्डी आने के बाद वहां पूरी तरीके से वह खत्म नहीं हुई थी।
विश्व में अन्य हॉट स्पॉट
- लाल सागर के दोनों और खाड़ी देशों का तटीय क्षेत्र
- ईरान व पाकिस्तान बॉर्डर पर सिस्तान-ब्लूचिस्तान क्षेत्र
- यमन व ओमान का तटीय क्षेत्र
- केन्या, ईथोपिया व सोमालिया का ट्राईएंगल क्षेत्र
- सूड़ान व दक्षिण सूड़ान की अंतरराष्ट्रीय सीमा
- चाड, नाइजर, माली व मोरिटियाना का लम्बा गलियारा
हॉट स्पॉट पर रहता है फोकस
रेगिस्तानी टिड्डी के भारत के रेगिस्तानी जिले हॉट स्पॉट है। टिड्डी हमले के दौरान हमारा अधिकांश फोकस इन्हीं जिलों में रहता है। अधिकांश टिड्डी यहीं नियंत्रित होती है।
संजय आर्य, संयुक्त निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर
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