जोधपुर. अम्मी की किडनियां खराब थी। वह डाइलिसिस पर थी। एक दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह हमें छोड़कर दुनिया से चली गई। यह सदमा अब्बा सहन नहीं कर पाए ओर महज छह दिन बाद उनकी भी हृदय गति रूकने से मौत हो गई। एक सप्ताह के भीतर मैंने अम्मी-अब्बा को खो दिया। मुझे उम्र भर अफसोस रहेगा कि कोरोना के कारण अब्बा को अपने हाथों से सुपुर्द ए खाक तक नहीं कर सका। इतना कहते ही नागौरी गेट क्षेत्र निवासी अब्दुल फरीद की आंखों से आंसू छलक गए।
उसने बताया कि 25 अप्रेल को अम्मी खेरूनिशा बानो (62) की मौत हो गई। कोरोना जांच भी नेगेटिव आई। अम्मी की मौत का अब्बा अब्दुल सलीम (67) को ऐसा सदमा लगा कि 30 अप्रेल को वे भी हमें छोड़कर चले गए। उन्हें हार्ड अटैक आया था। उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई।
भुगता पड़ा कोरोनटाइन का दर्द
अब्दुल फरीद ने बताया कि अब्बा की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों का टेस्ट करवाया गया। जिसमें मेरी (अब्दुल फरीद) पत्नी तसीलम बानो व भाभी नसीम बानो की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हमें बोरोनाड़ा कोरोनटाइन सेंटर 14 दिन तक रखा। ऐसे में बच्चे घर पर अकेले रहे। उन्हें दो वक्त के भोजन के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। जैसे-तैसे यहां 14 दिन निकाल घर गए तो वहां भी हमें 28 दिन का होम कोरोनटाइन कर दिया। भला हो पड़ोसियों व रिश्तेदारों का जिन्होंने ऐसे वक्त में भी हमारी मदद की।
प्रशासन से नाराजगी , कुछ सवाल
पार्षद जाहिद हसन रहमानी ने बताया कि उनके फुफा सुसर अब्दुल सलीम की मौत होने पर उन्होंने खुद कोरोना टेस्ट करवाने की बात नागौरी गेट थानाप्रभारी से कही थी। लेकिन बात यह फैलाई गई कि हम अंतिम संस्कार कर रहे थे ओर पुलिस ने रूकवाकर कोरोना टेस्ट करवाया।
- फुफी सास खेरूनिशा बानो की मौत के बाद टेस्ट में उनकी रिपोर्ट कोरोना नेगेटिव कैसे आई जबकि वह तो फुफा ससुर अब्दुल सलीम के साथ ही रहती थी।
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