जोधपुर. योग के माध्यम से बेहतर जीवन शैली और स्वस्थ रहने के लिए पूरे विश्व में भले ही 21 जून को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है लेकिन सदियों से ऋषियों-मुनियों ने योग की परम्परा को आगे बढ़ाने की परम्परा का प्रयास करने वालों को पथरीली राहों से भी गुजरना भी पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही सामना वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागृत करने का बीड़ा उठाने वाले जोधपुर के युवा योग प्रशिक्षक प्रदीप कुमार प्रजापति को भी करना पड़ रहा है जो कोरोना से जंग जीतने के लिए आम मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों को पथरीली चट्टान पर योग का प्रशिक्षण देने को मजबूर है। जगह की परेशानी के बावजूद मसूरिया पहाड़ी के निर्जन उबड़ खाबड़ स्थान को योग्य समतल बनाकर इन दिनों 50 से अधिक बच्चों, युवाओं, महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने योग प्रशिक्षण का कार्य जारी रखे हुए है। पथरीली चट्टान पर सुबह 6 बजे से से 8 बजे तक योग प्रशिक्षण में क्षेत्रवासी अनुशासन के साथ सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते है। योग प्रशिक्षक प्रदीप ने अवकाश का सदुपयोग करने दो माह पूर्व मसूरिया पहाड़ी स्थित वीर दुर्गादास पार्क की पार्किंग परिसर में साफ सफाई करके योगाभ्यास आरंभ किया। धीरे धीरे क्षेत्र के 50 से अधिक युवा, महिलाएं, बच्चे और युवाओं को जोड़कर योगाभ्यास शुरू किया। लेकिन 20 दिन पहले वहां तैनात चौकीदार और वीर दुर्गादास राठौड़ स्मारक समिति के लोगों ने योगभ्यास करने से मना कर दिया गया । लेकिन अध्यापक पिता की प्रेरणा से योग प्रशिक्षक प्रदीप ने हिम्मत नहीं हारी और पहाड़ी के अन्यत्र छोर पर ही लोगों को योग प्रशिक्षण देने का कार्य निरंतर जारी रखे हुए है। निशुल्क योग शिविर में लोगों का सहयोग मिलने लगा है। प्रत्येक रविवार को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योग सीखने आने वालों को निशुल्क आयुर्वेदिक काढ़ा पिला रहे हैं।
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