जोधपुर. लॉक डाउन के दौरान पुलिस ने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के अलावा घरों में बंद बुजुर्ग व्यक्तियों व गर्भवती को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए। सीनियर सिटीजन के लिए हेल्पलाइन नम्बर शुरू किए। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बनाकर ऑनलाइन परामर्श व्यवस्था भी करवाई। भामाशाहों की मदद से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) प्रीति चन्द्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र यादव के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शुक्रवार को यह जानकारी दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में राज्य के सभी आईजी रेंज, पुलिस कमिश्नर, जिलों के एसपी व पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उपाधीक्षक व थानाधिकारी शामिल हुए। वीसी में पुलिस कमिश्नर जयपुर, उदयपुर रेंज आईजी के साथ अजमेर, भीलवाड़ा व जोधपुर कमिश्नरेट से डीसीपी प्रीति चन्द्रा को लॉक डाउन के प्रयासों से अवगत कराने का मौका मिला। वहीं, राज्यभर के छह थानाधिकारियों में से जोधपुर कमिश्नरेट के सदर कोतवाली थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने कोरोना से आमजन बचाने के प्रयासों की जानकारी दी।
डीसीपी प्रीति चन्द्रा ने कहा कि बीमार या पचास वर्ष से अधिक आयु वाले पुलिसकर्मियों को फील्ड की बजाय ऑफिस वर्क में काम लिया गया। नाकों पर तैनात पुलिसकर्मियों ने परिजन के संक्रमित होने की आशंका जताई थी। ऐसे में इनके लिए होटल व गेस्ट हाउस में ठहरने की व्यवस्था कराई गई।
गली-मोहल्लों में भामाशाह बनाए, आधी रात तक गश्त की
सदर कोतवाली थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने कहा कि थानाधिकारी का कार्यभार संभालते ही लॉक डाउन लगा। संक्रमण सामने आते ही हर गली-मोहल्ले सील कराए। दो महीने तक कफ्र्यू रहा। पुलिस कमिश्नर व डीसीपी से पर्याप्त मैन पावर व अन्य सुविधाएं मिलीं। जनता की जरूरत के लिए गली-मोहल्लों में भामाशाह बनाए। निर्धन लोगों के लिए खाने व पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था तक कराई गई। वृद्धावस्था पेंशन राशि निकालने के लिए लोगों के पास एटीएम नहीं हैं। ऐसे में ई-मित्र पर राशि निकास की व्यवस्था कराई गई थी। संक्रमण रोकने को उच्चाधिकारियों के साथ रात 12-1 बजे तक गश्त करते रहे।
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