जोधपुर. वर्ष के सबसे बड़े दिन रविवार को हुए सूर्यनगरी में हुए सूर्यग्रहण के दौरान सूरज दूज के चांद सा नजर आया। सूर्यग्रहण के समय अद्भुत नजारा रिंग ऑफ फायर जैसी खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों में कौतुहल रहा। करीब तीन घंटे 28 मिनट के ग्रहणकाल के अनूठे नजारे को देखने के लिए विभिन्न स्थानों पर घरों की छतों पर टेलिस्कोप और विशेष चश्मों की सहायता ली गई। ग्रहण मध्यकाल में सूरज की रोशनी मद्विम होने के बाद करीब 12.30 बजे बाद धीरे धीरे सूरज की रोशनी तेज होती चली गई। जिन लोगों ने सिल्वर कोटेड फिल्टर से ग्रहण का नजारा देखा उन्हें सूर्य चांद सा नजर आया जबकि काली शीट प्रयुक्त करने वालों को पीला दिख रहा था। बच्चों मेंआसमां में बादलों के बीच इस नजारे को देखने के प्रति विशेष उत्साह नजर आया। वैश्विक महामारी के कारण धार्मिक स्थलों के कपाट पहले से ही बंद होने से लोगों ने घरों में ही कीर्तन, पाठ व मंत्र जाप किया गया। ग्रहणकाल का सूतक करीब 12 घंटे पहले शुरू होने के कारण घरों में सुबह खान पान से जुड़ी दिनचर्या प्रभावित रही। लोगों ने जलपात्रों की शुद्धता के लिए डाब का प्रयोग किया। ग्रहण पुण्यकाल में लोगों ने जरूरतमंद लोगों को वस्त्र व अन्न तथा शहर की प्रमुख गौशालाओं में लापसी और चारे का वितरण किया गया। ग्रहण से प्रभावित होने वाले राशियों के जातक जप तप व धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहे। जोधपुर में करीब 91 प्रतिशत परम ग्रास रहा कंकणाकृति सूर्य ग्रहण सुबह 10.08 को स्पर्श, 11.47 बजे मध्यकाल, दोपहर 1.36 बजे मोक्ष हुआ। ग्रहण मोक्ष काल के बाद स्नान आदि कर नित्य पूजा कर्म कर ही भोजन ग्रहण किया गया। सूर्य ग्रहण के अवधिकाल में एक साथ 6 ग्रह बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु वक्री रहने से संबंधित राशि वाले जातकों ने ग्रहण के समय संयम,ध्यान व जाप किया। ग्रहण का नकरात्मक प्रभाव इंसानों के साथ पशु-पक्षियों पर भी होने के कारण है कि ग्रहण के दौरान पशु-पक्षियों की दिनचर्या में आंशिक बदलाव देखा गया
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3fOFL3t
0 comments:
Post a Comment