विश्व पर्यावरण दिवस : पश्चिमी विक्षोभों ने 1 महीने में 8 राज्यों तक पहुंचाई टिड्डी

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गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. भूमध्यसागर से होकर खाड़ी देशों के ऊपर से भारत आने वाली हवा यानी पश्चिमी विक्षोभों के कारण टिड्डी इस बार एक महीने पहले ही भारत पहुंच गई। ग्लोबल वार्मिंग के कारण सर्दियों में आने वाले विक्षोभ फरवरी के बाद अधिक संख्या में आए। मार्च और अप्रेल में आए 12 पश्चिमी विक्षोभ में प्रत्येक से बारिश नहीं हुई, लेकिन ये अपने साथ बादल लाए और नमी बढऩे से टिड्डी को फलने-फूलने में मदद मिली।


विक्षोभों की वजह से ईरान के दक्षिणी भाग में मार्च-अप्रेल में जमकर बरसात हुई। रेगिस्तानी मिट्टी व नमी टिड्डी प्रजनन के लिए अनुकूल होती है। ऐसे में टिड्डी वहां खूब फली-फूली। भारत में 30 अप्रेल को वयस्क टिड्डी दलों के प्रवेश के बाद यह करीब एक महीने में ही 8 राज्यों राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और छतीसगढ़ तक पहुंच चुकी है। अभी राजस्थान के 18, यूपी के 17, एमपी के एक दर्जन से अधिक जिले हाई अलर्ट पर है। मई के अंतिम सप्ताह में आए दो-तीन विक्षोभों के कारण ही टिड्डी मध्य भारत तक पहुंचने में कामयाब रही।

44 साल बाद आए एक साथ 8 साइक्लोन
उत्तरी हिंद महासागर में 44 साल बाद 2019 में एक साथ आए 8 साइक्लोन ने टिड्डी की विकराल समस्या खड़ी कर दी। 1976 के बाद यह पहला मौका था कि एक के बाद एक साइक्लोन अरब सागर केपानी को घूमा रहे थे। घूमता हुआ पानी अरब के रेगिस्तान में बरसने से टिड्डी का खूब प्रजनन हुआ। खाड़ी देशों ने गौर किया नहीं और टिड्डी अफ्रीकी देशों में तांडव मचाती हुई पाकिस्ताान और भारत पहुंच गई।

पाकिस्तान व सोमालिया में इमरजेंसी
टिड्डी के कारण इस साल फरवरी में पाकिस्तान और सोमालिया को नेशनल इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। वर्ष 2019 में भारी संख्या में पैदा हुई टिड्डी को खत्म करना संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन के लिए भी भारी पड़ा और 2020 में अब यह और ताकतवर बड़े दलों के साथ हमारे सामने हैं।

इसलिए खतरनाक है टिड्डी
- टिड्डी एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक उड़ सकती है।
- टिड्डी एक दिन में खुद के वजन के बराबर यानी 2 ग्राम खाना खाती है। एक छोटे टिड्डी दल में 4 से 8 करोड़ टिड्डी होती है।
- एक सामान्य टिड्डी दल एक दिन में इतनी वनस्पति चट कर जाता है जितना 2500 लोग एक साल में खाते हैं।
- यह फसल, वनस्पति सब चट कर जाती है। केन्या, सोमालिया व इथोपिया में खाद्य संकट खड़ा हो गया है।
- चारागाह नष्ट करने से मवेशी और जंगली पशु भी भूखे मर जाते हैं।



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