अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. कोरोना वायरस की रोकथाम में इन दिनों रामबाण माने जाने वाली दवा हाईड्रोक्लोरोक्वीन को चीन में हुए शोध ने बेअसर करार दिया है। इसका खुलासा ब्रिटिश मेडिकल जनरल में प्रकाशित शोध में हुआ है। इसका उपयोग भी लक्षण व बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों के मरीजों पर किया गया था। लेकिन दवा से दोनों ही तरह के संक्रमितों पर कोई विशेष असर नजर नहीं आया। बता दें कि ये शोध हाल ही 14 मई को प्रकाशित हुआ है।
ब्रिटिश मेडिकल जनरल में बताया गया कि करीब 150 मरीजों को शोध के लिए चुना गया। इनमें पचास फीसदी मरीजों को हाइड्रोक्लोरोक्वीन दी गई। वहीं पचास फीसदी अन्य मरीजों को साधारण प्रक्रिया से सर्पोटिंग उपचार के जरिए ठीक करने का प्रयास किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि हल्के और मध्यम कोविड-19 के मरीजों को कुछ दिन उपचार के बाद दोनों में रिपोर्ट नेगेटिव आने की संभावना एक जैसी थी। शोध अनुसार दवा हाईड्रोक्लोरोक्वीन ज्यादा असरकारी नहीं है। इसके अलावा कई रोगियों में दवा के साइड इफैक्ट भी देखने को मिले। शोधकर्ताओं ने कहा कि साइड इफैक्ट बहुत कम थे, लेकिन उन्हें किसी भी तरह से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।
कई चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ ले रहा हाईड्रोक्लोरोक्वीन दवा
देश-प्रदेश में कई कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी देने वाले चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ हाईड्रोक्लोरोक्वीन दवा ले रहा है। जबकि कई चिकित्सकीय स्टाफ सप्ताह में दो दिन गोली ले रहा है। भारत में हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा प्रचुर मात्रा में है। ऐसे में दवा को रिसर्च में बेअसर बताना भी चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ा झटका है। जबकि ये दवा मलेरिया व अर्थराइटिस (गठिया) मरीजों को दी जाती है। इस दवा के इन मरीजों पर प्रयोग प्रायोगिक दृष्टि से अच्छे गए हैं।
इनका कहना है
जो मरीज वेंटिलेटर नहीं बल्कि ऑक्सीजन पर थे, उन्हें भी हाइड्रोक्लोरोक्वीन देकर देखा गया। रिसर्च के मुताबिक कोई विशेष फायदा नहीं हुआ।
- डॉ. जीके बोहरा, एसोसिएट प्रोफेसर, एम्स जोधपुर
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