जोधपुर. पुलिस महानिदेशक (कारागार) एनआरके रेड्डी का कहना है कि जेलों में बंद रहने के बाद छूटने पर महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिवार व समाज ही नहीं हर स्तर पर अपमानित होती हैं। तेल कम्पनियों से वार्ता करने के बाद जेल से छूटने वाली जरूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंप पर नौकरी देने का निर्णय किया गया। जेल से बाहर आने के बाद जेल प्रशासन की ओर से सम्पर्क किया जाएगा और यदि किसी महिला को परेशानी आती है तो उन्हें पेट्रोल पंप पर काम दिलाया जाएगा। यह प्रक्रिया चार-पांच दिन में शुरू की जा रही है।
जयपुर जेल में बंदियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद जोधपुर सेन्ट्रल जेल का निरीक्षण करने के दौरान शुक्रवार शाम जेल डीजी एनआरके रेड्डी ने पत्रकारों से वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन से पहले से जेलों में बंदी फिनायल, झाड़ू, पोछा आदि तैयार कर रहे हैं। बदले में पारिश्रमिक दिया जा रहा है। अब मास्क व सेनेटाइजन भी बनाए जाने लगे हैं। कुछ समय पहले जेलों में बंदियों के काम-काज से चौदह लाख रुपए सालाना आय होती थी। जो अब बढ़कर दो करोड़ रुपए हो गई है। राज्य सरकार इस राशि को जेलों पर ही खर्च कर रही है।
जेलों में बनाए जाएंगे मसाले
डीजी रेड्डी ने कहा कि राज्य की सभी जेलों में खाद्य मसाले बनाए जाएंगे। जोधपुर के मथानिया की प्रसिद्ध लाल मिर्ची खरीदकर जेलों में ही मसाले बनाए जाएंगे। राज्य की जेलों में बीस हजार से अधिक बंदियों के खाने में काम लिया जाएगा। इसके बाद लाल मिर्ची पाउडर का अधिक उत्पादन होने पर बाजार में बेची जाएगी।
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