वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है लॉकडाउन का खामियाजा, पानी की खेलियां सूखने पर उपवन संरक्षण ने मांगा सहयोग

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नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. जिले में बढ़ती गर्मी के कारण पानी की तलाश में संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकलने वाले प्यासे वन्यजीवों को भी लॉकडाउन के नियमों को तोडऩे का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। भूखे प्यासे चिंकारे पानी की तलाश में भटकते हुए रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचने पर श्वानों के हमले और शिकारियों से बचाने वाला कोई नहीं है। जिले में करीब 153 से अधिक वन्यजीव बहुल इलाकों में इन दिनों पेयजल संकट की स्थिति है।

कोरोना-लॉकडाउन और गर्मी में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की स्थिति में खुले मैदानों में विचरण करने वाले 30 हजार से अधिक चिंकारे, काले हरिण, मोर, रोजड़े, सियार,मरु बिल्ली, बंदर, लोमड़ी इत्यादि मूक-प्राणी चौतरफा संकट से घिर गए हैं। राजस्थान पत्रिका के माध्यम से अपील वनविभाग के वन्यजीव प्रभाग और प्रादेशिक वन मंडल को उनके अधीन संबंधित रेंज क्षेत्रों में विचरण करने वाले वन्यजीवों के लिए सरकार से कोई बजट नहीं मिला है।

ऐसे में वनविभाग के जिला उपवन संरक्षक (वन्यजीव) महेश चौधरी ने राजस्थान पत्रिका के माध्यम से संबंधित वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में भामाशाहों व पर्यावरणप्रेमियों को पानी के टांके, नाडे-नाडियां, सूखी खेळियों में टैंकर से पानी की व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। जिले के हर पंचायत क्षेत्रों में विचरण करने वाले वन्यजीव इन दिनों लॉक डाउन के कारण पानी की खेळियां सूखी होने से कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे है। जोधपुर जिले में लॉकडाउन के चलते आधा दर्जन वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

153 जगह पर पानी का संकट
जोधपुर में वन्यजीव प्रभाग के अधीन लूणी, बावड़ी, मंडोर तथा प्रादेशिक वनमंडल के बाप,फलौदी, शेरगढ़, बालेसर, बिलाड़ा, भोपालगढ़ व ओसियां सहित नौ रेंजों में करीब 153 से ज्यादा वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्रों में पानी का संकट है। जोधपुर जिले में जाजीवाल विश्नोइयां, फींच,धवा,जोलियाली,बनाड,जालेली,लूणावास खारा,विष्णु नगर ,लूणी, हमीर नगर,रोहिचा, भाचरणा, नारनाडी, पालासनी, खुडाला,ढाणा,गुड़ा विश्नोईयान, भवाद, नेतडा,दुग्गर,सुराणी,खारी, चिरढाणी, हड़लाव ढाणी,बूचेटी, बिडासनी,खेजड़ली, खारड़ा मेवासा, एकलखोरी, झरिया, विनायकपुरा, दईकड़ा, सुरपुरा, भगतासनी, बेरु, महादेव नगर, बांवरला, आकथली, रामड़ावास, धोरू, हिंगोली, लाम्बा, रावर, तिलवासनी, कोसाना में सर्वाधिक संकट है।

अभी तक नहीं मिला बजट
ग्रीष्मकाल के दौरान पानी के अभाव वाले वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में पानी की टैंकरों से आपूर्ति के लिए बजट अभी तक नहीं मिला है। लॉकडाउन के बीच जिले के पर्यावरण प्रेमियों और भामाशाहों को पानी की व्यवस्था के लिए आगे आने की जरूरत है।
-महेश चौधरी, उप वन संरक्षक ( वन्यजीव ) जोधपुर

सरकार का साथ देने को तैयार
कोरोना-लॉकडाउन एवं गर्मी के मौसम में भूखे-प्यासे वन्यजीवों व पशु-पक्षियों की स्थिति बेहद गंभीर है। वन्यजीवों का वजूद बचाए रखने के लिए सरकार को विशेष बजट की व्यवस्था कर वनविभाग के कर्मियों ,पशुपालन विभाग व पर्यावरण संस्थाओं के वॉलियन्टर्स की संयुक्त टीमों का गठन कर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत पानी के टैंकरों से राहत पहुंचाने की जरूरत है। वैश्विक संकट की घड़ी में वन्यजीवों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए सभी पर्यावरण प्रेमी सरकार व प्रशासन का पूरा सहयोग करने को तैयार है।
-रामपाल भवाद, प्रदेशाध्यक्ष बिश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था बिश्नोई टाईगर फोर्स



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