जोधपुर।
कोरोना के कहर से जोधपुर के उद्योगों में भी पिछले करीब एक पखवाड़े से मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी है। लॉकडाउन से औद्योगिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है। काम ठप है और उद्योग वेंटिलेटर पर आ गए है। उद्यमी परेशान है कि लॉकडाउन खुलने के बाद मरणासन्न उद्योगों को फिर कैसे संचालित किया जाएगा, न कच्चे माल आ रहा है और न ही तैयार माल जा रहा है। पहले जो माल भेजा गया है, उसका भुगतान अटक गया है। बड़ी संख्या में श्रमिक पलायन कर गए है। ऐसे में उद्यमियों के लिए उद्योगों को पुन: खड़ा करने के लिए कई चुनौतियां है। उद्यमी चाहते है कि दम तोड़ रहे उद्योगों को केन्द्र व राज्य सरकार ऑक्सीजन के रूप में अच्छा राहत पैकेज दे, तांकि उद्योगों में जान आए। ताकि उद्योगों का सुचारु संचालन हो व उद्योग विकास की गति पकड़े।
राजस्थान पत्रिका की ओर से शुक्रवार को प्रमुख उद्यमियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की गई, जिसमें उद्यमी ऑनलाइन रूबरू हुए और अपने मन की बात कहीं। उद्यमियों ने कहा कि सरकार राहत देगी तो उद्योगों का संचालन आसानी से होगा। इससे मजदूरों को भी रोजगार मिलेगा। पत्रिका के इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में शहर के प्रमुख उद्योगों में शुमार हैण्डीक्राफ्ट, टेक्सटाइल व पर्यटन उद्योग से जुड़े उद्यमी-व्यवसायी शामिल हुए और अपनी बात रखी।
सरकार को एक्सपोर्ट से जुड़ी सभी इकाइयों पर इनकम टेक्स को पूरा माफ करना चाहिए। आज जब पूरा विश्व आर्थिक महामंदी के दौर से गुजर रहा है तो विदेशी मुद्रा की व्यवस्था करने वाले एक्सपोर्टर्स पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा सरकार को निर्यातकों को इंसेंटिव व सब्सिडी देनी चाहिए। सरकार एक्सपोर्टर्स को ब्याज मुक्त ऋ ण उपलब्ध करवाए ताकि निर्यातकों द्वारा भेजा गया एक्सपोर्ट विश्व बाजार में कॉम्पटीटिव बना रहे।
राधेश्याम रंगा, वरिष्ठ हस्तशिल्प निर्यातक
--
हस्तशिल्प निर्यात के लिए यह पूरा साल खराब है, इस उद्योग को खड़े होने में कम से कम 6 से 8 माह का समय लगेगा। अभी अन्य देशों की अर्थव्यवस्था भी डांवाडोल है। लॉकडाउन खुलने के बाद ऑर्डर में कमी आएगी, फैक्ट्री चलाने के लिए लेबर की व्यवस्था करना करना भी चुनौती होगी, इससे मजदूरों रोजगार देन में भी कमी आएगी। सरकार से इस उद्योग को विशेष सब्सिडी की जरूरत है। कंटनेर्स टंासपोर्ट में राहत, बिजली दरों, बैंकिंग ऋण आदि में सरलीकरण होना चाहिए।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
---
लॉकडाउन व विश्वव्यापी मंदी से ऑर्डर्स कैंसिल हो गए है। निर्यातकों को बिजनेस खड़ा करने के लिए लंबी लड़ाई लडऩी होगी। इसके लिए सरकार के सहयोग की बहुत जरूरत होगी। कंटेनर्स अटके पड़े है, मजदूर पलायन कर गए है, विदेशी ग्राहक हमारे द्वारा पहले से ही भेजे गए माल के कंटेनर्स को नहीं छुड़वा रहे हैं और हमसे माल छुड़वाने के लिए कई तरह के इंसेंटिव मांग रहे है। ऐसे में इस उद्योग को बचाने के लिए हम सरकारी राहत की उम्मीद कर रहे है।
निर्मल भंडारी, वरिष्ठ निर्यातक
---
हैण्डीक्राफ्ट के बाद उभरे टेक्सटाइल उद्योग पिछले करीब दो साल से संकट के दौर में चल रहा है। अवैध इकाइयों की वजह से सरकार व एनजीटी के कारण उद्योग खराब हो गया है। करीब सात लाख मीटर प्रतिदिन उत्पादन होता था आज उत्पादन जीरो हो गया है। ऐसी स्थिति में उद्योग को खड़ा करना मुश्किल होगा। सरकार अगर इस उद्योग को राहत नहीं देगी तो यह उद्योग खत्म हो जाएगा। सरकार को बिजली दरों, बैंक ऋणों आदि में रियायत देनी चाहिए।
ज्ञानीराम मालू, अध्यक्ष
मरुधरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
--
लॉकडाउन से उद्योग चौपट हो गया है। सरकार को बिजली बिलों को छह माह तक माफ करने चाहिए। स्टाफ सैलेरी-मजदूरों के वेतन के लिए इएसआइ विभाग का योगदान मिलना चाहिए। गारमेंट एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ड्रॉ बैक के रूप में प्रोत्साहन बढऩा चाहिए। रीको की ओर से लिए जाने वाले डवलपमेंट चार्जेज एक साल के लिए माफ होने चाहिए। कच्चे माल पर जीएसटी में छूट मिलनी चाहिए।
मनोहर खत्री, उद्यमी व कोषाध्यक्ष
जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण ट्रस्ट
---
मार्च से मई में ज़्यादा कपड़ा प्रोडक्शन होता है। लॉकडाउन के चलते तीनों माह निकल जाएंगे, फि र मानसून आ जाएगा। कऱीब 20 हजार हज़ार लोगों का रोजग़ार छिन गया है। लॉकडाउन के ख़त्म होने के बाद जब उद्योग चालू होंगे तो राज्य सरकार से निवेदन रहेगा कि बिजली के फि़ क्स चार्ज माफ़ करे और उद्योग पर थोपे गए नियमों में थोड़ी उदारता रखे, जिससे उद्यमियों को राहत मिलेगी व वे अपने उद्योग पुन: खड़ा कर सकेंगे।
वरुण धनाडिय़ा, युवा उद्यमी
--
भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन उद्योग का 10 प्रतिशत हिस्सा है। इससे इस व्यवसाय से जुड़े लाखों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। लॉकडाउन से होटल व्यवसाय चौपट हो गया है। सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद है कि सरकार फिक्स चार्ज, लाइसेंस फीस, अग्निशमन लाइसेंस फीस घटाने व नगर निगम के टेक्स में रियायत दे, तो यह उद्योग फिर से सुचारू रूप से चल सकेगा।
जेएम बूब, होटल व्यवसायी
---
कोरोना महामारी से सभी होटल्स, रेस्टोरेंट्स व मेरिज गार्डन बंद हो गए है, कोरोना के बाद भी इस व्यवसाय को पुन: चालू करने में काफी दिक्कतें आएगी। व्यवसाय को पुनर्जीवित होने में करीब 6 माह का समय लग जाएगा। सरकार से इस उद्योग को प्रोत्साहन देना चाहिए।
हिमांशु टांक, गेस्ट हाउस संचालक
---
वर्तमान में देश की इकोनॉमी तीन ट्रिलियन डॉलर है। उसमें लघु उद्योगों व व्यापारियों का 25 प्रतिशत योगदान है। लॉकडाउन से सबसे ज्यादा यह तबका प्रभावित हो रहा है। हमने लघु उद्योगों की मांगों से अवगत करा रहे है। उम्मीद है कि जल्द ही इस वर्ग के लिए सरकार राहत पैकेज उपलब्ध कराएगी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रहे, इसके लिए खुदरा व्यापारी कर्मचारी मजदूर कोरोना फाइटर के रूप में काम कर रहे है, इस वर्ग के लिए हमने सरकार से 50 लाख रुपए बीमा की मांग की है।
प्रसन्नचंद मेहता, अध्यक्ष
मारवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री
-----------------------------
कोरोना से होटल व पर्यटन व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है। सरकार को इस उद्योग को खड़ा करने के लिए राहत पैकेज की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा होटल इंडस्ट्री से बिजली के चार्जेज इंडस्ट्रियल चार्ज लेना चाहिए न कि कॉमर्शिायल चार्ज ।
पवन मेहता, होटल संचालक
----
प्रमुख मांगे
- हैण्डीक्राफ्ट व टेक्सटाइल उद्योग को विशेष पैकेज दिया जाए।
- लॉकडाउन खुलने के बाद करीब 6 माह तक उद्योगों को बिजली के फिक्स चार्ज मुक्त किए जाए।
- अगले तीन माह तक उद्योगों को फ्री बिजली आपूर्ति की जाए।
- रीको की ओर से वसूले जाने वाले सभी डवलपमेंट चार्ज माफ किए जाए।
- बैंक ऋण की किश्तों, जीएसटी भुगतान से राहत दी जाए।
- हैण्डीक्राफ्ट उद्योग को इनकम टेक्स से मुक्त किया जाए।
- पर्यटन इंडस्ट्री को प्रोत्साहन दिया जाए।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3b0mrhW
0 comments:
Post a Comment