अमित दवे/जोधपुर. कोविड-19 से जंग लडऩे के साथ सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। इसी कारण मॉडिफाइड लॉकडाउन लागू किया गया। शहर के रीको क्षेत्र व कंटेनमेंट जोन से बाहर के क्षेत्रों में उद्योग चलाने के लिए पास तो जारी हुए, लेकिन इसके बाद भी औद्योगिक गलियारों में रौनक नहीं लौटी। हकीकत यह है कि अनुमति की तुलना में आधी से भी कम इकाइयां चल रही हैं। इसकी वजह बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन कर जाना। साथ ही, मौजूदा लेबर का पूरी संख्या में काम नहीं करना, इस वजह फैक्ट्रियों में काम नहीं हो रहा और उत्पादन नगण्य है। उद्यमियों का कहना है कि सख्त नियम-कायदों में सुधार होने, पर्याप्त लेबर होने की स्थिति में ही उद्योगों का सही संचालन हो पाएगा।
बोरानाडा में चल रही बीस प्रतिशत इकाइयां
मॉडिफाइड लॉकडाउन में उद्योगों के संचालन के लिए बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्र में सबसे अधिक करीब एक हजार पास जारी किए गए है। हकीकत में यहां बीस प्रतिशत इकाइयां भी नहीं चल रही है। बोरानाडा में हैंडीक्राफ्ट, इंजीनियरिंग, पैकेजिंग, एग्रो फूड, ग्वारगम आदि सब मिलाकर करीब 170-175 फैक्ट्रियां चल रही है। इन इकाइयों में मजदूर कम है। ऐसे स्थिति में इन इकाइयों में उत्पादन सहित मूल कार्य प्रभावित हो रहा है।
रीको जोधपुर में भी यही हाल
रीको जोधपुर के क्षेत्र के हाल भी ज्यादा अच्छे नहीं है। रीको जोधपुर क्षेत्र में अब तक 400 इकाइयों को 1150 पास जारी किए गए। 200 इकाइयों को संचालन की अनुमति दी गई। इन क्षेत्रों में सब मिलाकर आधी इकाइयां भी मुश्किल से चल रही है।
औद्योगिक क्षेत्रों में पसरा सन्नाटा
मॉडिफाइड लॉकडाउन में सरकार की ओर भले ही उद्योगों के संचालन की अनुमति दे दी गई हो, लेकिन मजदूरों की भारी कमी, सख्त गाइडलाइन की वजह से औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा है। यहां रह गए मजदूरों की परेशानियां कम नहीं है। उद्योग नहीं चलने से मजदूर बेरोजगारी के कगार पर पहुंच गए है। वहीं फैक्ट्रियों में रहने वाले कुछ मजदूरों का कहना है कि उन्हें केवल खाने के सामान लाने के लिए पैसे दिए जा रहे है। कइयों ने बताया कि उन्हें मासिक वेतन भी नहीं मिला है, इससे उनकी हालत खराब है।
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