World Sleep Day विशेष : नींद में आते हैं खर्राटें तो हो जाइए सावधान, इस तरह खुद को रख सकते हैं फिट

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अरविंदसिंह राजपुरोहित/जोधपुर. आज की तनाव व भागदौड़ भरी लाइफ में नींद कहीं न कहीं पीछे छूटती जा रही है। नौकरी हो या व्यापार, शिक्षा हो या कला सभी जगहों पर प्रतिस्पर्धा के चलते मानव खुद की नींद के लिए भी समय नहीं निकाल पाता है। ऐसे में कम नींद लेने की समस्या के चलते मानव विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार होता जाता है। जबकि स्वास्थ्य के लिहाजा से पर्याप्त नींद लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतना ही नहीं कई लोग नींद में खर्राटे लेने की समस्या को भी हल्के में लेते हैं।

जबकि स्वस्थ रहने के लिए खर्राटों को कम किया जाना बेहद जरूरी है। ऐसे में लोगों को नींद की समस्याओं से छुटकारा दिलाना व नींद की गड़बडिय़ों को लेकर जागरूक करने के लिए वल्र्ड स्लीप डे कमेटी ऑफ द वल्र्ड स्लीप सोसाइटी द्वारा स्लीप डे का आयोजन किया जाता है। एक स्टडी के मुताबिक विश्व में दस करोड़ से अधिक लोग स्लिप एप्निया से परेशान हैं। विश्व स्लीप डे के मौके जानिए किस तरह से हम स्वयं को नींद लेकर स्वस्थ रख सकते हैं।

सी पैप मशीन का करें यूज
हम अपने आसपास कई लोगों को नींद लेते समय खर्राटे लेते हुए देखते आए हैं। कई बार ये खर्राटे स्लीप एप्निया का कारण भी हो सकते हैं। इनसे बचने के लिए सी-पैप मशीन कारगर उपचार है। इसे नैबोलाइजर भी कहते हैं। इसे नाक पर लगाकर सोने से स्टीम मिलती रहती है। जिससे वायु-मार्ग खुला रहता है व व्यक्ति चैन की नींद सो सकता है। इसके इस्तेमाल से खर्राटों में कमी होने के साथ-साथ नींद पूरी होने व ऑक्सीजन ठीक से मिलने से आप दिनभर एक्टिव रहते हैं, मूड ठीक रहता है व याददाश्त में सुधार होता है।

इसलिए होता है स्लीप एप्निया
एम्स चिकित्सकों के अनुसार सोते समय जब हम सांस लेते हैं तो ऑक्सीजन नाक या मुंह के माध्यम से गले में स्थित वायु-मार्ग से होती हुई सीधे फेफड़ों और हृदय तक पहुंचती है। कई लोगों में विभिन्न कारणों के चलते यह मार्ग बाधित हो जाता है। जिसकी वजह से ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती है। यह स्थिति गले में कंपन पैदा करती है जो कि खर्राटे के रूप में सुनाई देती है। कभी-कभी यह रुकावट इतनी गंभीर हो जाती है कि गले का वायु-मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति को बेचैनी महसूस होने लगती है।

जानिए कहीं आप में तो नहीं यह लक्षण
- दिनभर थकान महसूस करना।
- ध्यान देने या रखने की क्षमता कम हो जाना।
- मूड में परिवर्तन या चिड़चिड़ापन।
- दिन के समय नींद आना। दुर्घटना होना।
- उत्साह में कमी, शरीर में चुस्ती-फुर्ती कम हो जाना।

अच्छी नींद के लिए स्लीप हाइजीन पर दें जोर
- सोने से दो से तीन घंटे पहले कुछ न खाएं।
- सोते समय टीवी व मोबाइल, लाउड आवाज का यूज न करें।
- नींद से पूर्व शराब, चॉय, कॉफी का दो घंटे तक सेवन न करें।
- सोने का फिक्स समय निर्धारित करें।
- योगा, प्राणायाम जैसे व्यायाम अवश्य करें।

खूद से पूछे यह सवाल
- सुबह उठने पर क्या आप तरोजाता महसूस करते हैं?
- कार्यस्थल पर थकान महसूस होती है?
- क्या आपको नींद में खर्राटे आते हैं

इनका कहना है
स्वस्थ जीवन शैली के लिए नियमित तौर पर 8 से 9 घंटे की नींद लेना आवश्यक है। पूरी नींद के अभाव में मधुमेह रोग, ब्लड प्रेशर, कब्ज, गैस की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इनसे बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव बेहद आवश्यक हैं।
- डॉ. जीके बोहरा, एसोसिएट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन विभाग एम्स

अच्छी नींद लेने के लिए जरूरी है कि हमेशा सकारात्मक रहें। सोने के कमरे को आरामदेह, शांत तथा नींद लेने के समय कम रोशनी का उपयोग करें। उठने व जागने का समय प्रतिदिन का निर्धारित करने से काफी हद तक नींद नहीं आने की समस्या से निजात पाई जा सकती है।
- डॉ. नरेश नेभिनानी, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग एम्स



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